Wednesday , November 21 2018

मछली पालन का व्यापार कैसे शुरू करें | How to start fish farming business in Hindi

मछली पालन का व्यापार कैसे शुरू करें | How to start fish farming business and get loan in Hindi

मछली पालन का व्यापार भारत में करना काफी लाभदायक सिद्ध हो सकता है, क्योंकि भारत की करीबन 60 प्रतिशत आबादी मछली को खाना पसंद करती है. मछली पालन को अग्रेंजी भाषा में फिश फार्मिंग भी कहा जाता है. इस कारोबार को शुरू करने के लिए नदी का होना बेहद जरूर होता है. वहीं हमारे देश में कई सारी नदियां, झीलें और समुद्र मौजूद हैं. जिनकी मदद से कोई भी इस व्यापार को शुरू कर सकता है. वहीं इस व्यापार को करने के लिए आपको जमीन की भी जरूरत पड़ती है. इस जमीन का उपयोग टैंक, तालाब या फिर ऐसा स्थान बनाने के लिए किया जाता है. जिसमें पानी भरा जा सके और मछलियों को पकड़ने के बाद इनमें रखा जा सके. वहीं इस व्यापार से जुड़ी अन्य जानाकरी आपको नीचे दी गई है.

मछली पालन क्यों करें

केवल भारत में नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मछलियों की मांग बढ़ती जा रही है. वहीं मांग बढ़ने का मुख्य कारण मछली का स्वादिष्ट होना और इसमें मौजूदा कई प्रोटीन एवं विटामिन्स के स्रोतों का होना है. इसलिए विश्व स्तर पर इसका बाजार बढ़ता ही जा रहा है.

मछली पालन व्यापार

जैसे हमने आपको ऊपर बताया कि इस व्यापार को करने का सबसे बड़ा स्रोत समुद्र, नदियां एवं तालाब होते हैं. लेकिन बढ़ती तकनीक के साथ लोगों ने मछली पकड़ने के पुराने प्राकृतिक तरीके छोड़कर नए तरीके अपना लिए हैं. अब लोगों ने कृत्रिम रूप से तालाब या टैंकों का निर्माण करके मछली पालन शुरू कर दिया है.  इतना ही नहीं समुद्र से मछली पकड़ने के व्यापार में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है. जिसका कारण लोगों द्वारा खुद से ही मछली फार्म का निर्माण करके मछली की पैदावार करना है. 

क्या है फिश फार्मिंग

फिश फार्मिंग का मतलब मछली को पालकर उसका आकार बढ़ाना एवं उनसे पैदा होने वाली मछलियों को पालना है. इतना ही नहीं इस व्यापार में लगने वाली लागत, प्राप्त होने वाले लाभ की तुलना में बहुत कम होती है. सीधे शब्दों में आप 5 से 10 गुना लाभ आसानी से कमा सकते हैं.

मछली पालन करने की प्रक्रिया

मछली पालन करने के लिए सबसे पहले तालाब या टैंक का निर्माण करना होता है. इसको बनाने के लिए आपको जमीन की जरुरत पड़ती है. अर्थात सबसे पहला कदम तालाब या मछलियों के रखने के स्थान का निर्माण करना है.

वातावरण के अनुकूल स्थान का चयन (site selection for fish farming)

मत्स्य या मछली पालन के लिए उचित स्थान का चयन करना बेहद आवश्यक है, ध्यान रखे की मछली पालन में वातावरण एवं जगह का बहुत फर्क पड़ता है. उदाहरण के तौर पर सर्दियों में या ठंडे इलाकों में मछली का आकार धीमी गति से बढ़ता है. अगर आप भारत में रहते हैं, तो कोशिश करें की तालाब का निर्माण सर्दियों के मौसम में पूरा कर लें. जिससे गर्मियां आने से थोड़ा पहले ही आप मछलियों को पालना शुरू कर दें.

मत्स्य पालन हेतु तालाब या स्थान का निर्माण (Pond Design And Construction process)

तलाब या टैंक का निर्माण आप कई तरीकों से कर सकते हैं, उदाहरण के तौर पर अगर आप मेहनत और समय बचाना चाहते हैं. तो प्लास्टिक के बड़े-बड़े टैंक खरीद सकते हैं. वहीं अगर आप जमीन पर इसका निर्माण करना चाहते हैं, तो आप मशीन की सहायता से उस जगह को तालाब के आकार में बना सकते हैं. वहीं अगर आपका बजट कम है तो आप फावड़े मदद से भी तालाब का निर्माण आसानी से कर सकते हैं. निर्माण करने के बाद ब्लीचिंग पाउडर और मिट्टी में चूने का छिड़काव जरूर कर दें. ऐसा करने से चयनित क्षेत्र में मछलियों को हानि पहुंचाने वाले कीट एवं अनावश्यक जीव मर जाते हैं.

मछलियों के खाने और जिन्दा रहने के इंतजाम (fish farming feeding systems)

मछलियों के व्यापार को तेजी देने के लिए जरूरी है कि मछलियां तालाब में जिन्दा रह सकें और उनकी संख्या बढा सकें. इसलिए आपको मछलियों के आवश्यक खाने का इंतजाम पहले ही कर लेना चाहिए. ध्यान रहे कि भोजन मछलियों के लिए अनुकूल होना चाहिए और हो सके तो मछली की प्रजाति को ध्यान में रखते हुए उनके खाने का इंतजाम करें. इतना ही नहीं उसके साथ ही तालाब के पानी को लेकर भी सावधानी बरतना जरूरी है. पानी सही है कि नहीं इसकी जांच करने के बाद ही इसको तालाब में डालें.

भारत में मछलियों की प्रजातियां (Selection of Fish Breeds)

मछली पालन के लिए सबसे महत्वपूर्ण एवं आवश्यक चीज है फार्मिंग के लिए मछली की प्रजाति का चुनाव करना. भारत में रोहू, कटला, मुर्रेल, टूना, ग्रास शार्प एवं हिस्ला मछलियों की प्रजातियां ही मुख्य रूप से पायीं जाती हैं. इस तरह की प्रजातियां मानसून एवं परिस्थितियों के हिसाब से अपने आपको ढाल भी सकती है. मतलब भारत में कारोबार करने के लिए इस तरह की मछलियां चयन करना लाभदायक साबित होगा. वहीं ये प्रजातियां भारत में आसानी से मिल जाती इसलिए इनके दाम भी काम होते हैं.

मछलियों का रख रखाव (maintenance)

इस व्यापार को सुचारु रूप से चलाने के लिए आपको मजदूरों की भी जरूरत पड़ती है. जो कि इन मछलियों का ख्याल रख सकें और समय-समय पर इन्हें खाना दे सकें. इसके साथ ही मछलियों को सुरक्षित रखना भी काफी महत्वपूर्ण होता है. वहीं अगर किसी मछली को कोई बीमारी हो जाती है, तो ऐसे में आप पोटेशियम परमैंगनेट और साल्ट यानि सोडियम का इस्तेमाल करें. क्योंकि एक मछली में फैलने वाले ये कीटाणु या रोग पूरी मछलियों को बीमार कर सकते हैं. इसलिए मछलियों की देखरेख का खास ध्यान रखें.

पानी की गुणवत्ता को बनाएं रखना

पानी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आपको तालाब को हर हफ्ते में एक बार साफ करना होगा. हालांकि आप इस प्रक्रिया को महीनें में दो बार भी कर सकते हैं. इसके साथ-साथ आपको तालाब में भरे पानी की पीएच मान भी 7 से लेकर 8 तक संतुलित करने की आवश्यकता होती है. ऐसा करने से मछलियों को साफ पानी मिलता है और मछलियों की उत्पादन क्षमता भी बढ़ जाती है.

मत्स्य पालन में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और उनके दाम (fish farming equipments)

मछली टैंक और तालाब (plastic pond for fish farming)

इस तरह के उपकरण यानी मछली टैंक की जरूरत तब पड़ती है. जब आप छोटे या घरेलू स्तर पर व्यापार करने की सोच रहे हैं. आप इस टैंक को अपने घर की छत पर भी स्थापित कर सकते हैं. या फिर आप एक निकली तालाब (कृत्रिम) खरीद सकते हैं. वहीं इनकी कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि आप कितना बड़ा टैंक लें रहे हैं

कहां से लें ये सामान

आप टैंक और तालाब ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से खरीद सकते हैं ऑफलाइन इन्हें खरीदने के लिए आपको किसी प्लास्टिक का सामान बेचने वाली कंपनी या दुकान पर जाना होगा. जहां पर आपको ये चीजें आसानी से मिल जाएगी. वहीं इसे ऑनलाइन आर्डर भी किया जा सकता है. https://www.alibaba.com/showroom/plastic-fish-farm-tank.html एवं https://dir.indiamart.com/impcat/aquaculture-tanks.html इन सभी लिंक पर जाकर के आप ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं.

पानी की जांच करने वाले उपकरण

पानी जांच करने वाले उपकरणों को आप नीचे बताए गए लिंक पर जाकर खरीद सकते हैं. इसकी कीमत 1500 रूपय के आस-पास है, इस उपकरण की जरूरत पानी की गुणवत्ता जांच करने के लिए पड़ती है.

https://dir.indiamart.com/impcat/water-testing-equipment.html

अन्य उपकरण और उनके दाम-

पम्प का इस्तेमाल पानी भरने एवं खाली करने के समय किया जाता है, आपको इसके लिए पाइप भी खरीदने की भी जरूरत पड़ती हैं. इन मशीनों की कीमत 3000 रुपए से शुरू होती है और लाख तक जाती है. वहीं आप अपने बजट को के हिसाब से मशीन लें. इसके साथ-साथ आपको मछली को तालाब से निकालने वाला उपकरण भी खरीदना पड़ता है. जिसकी कीमत 100 रुपए के आस पास पड़ जाती है.

मछली पालन करने के तरीके (Different types of fish farming)

वैसे तो मत्स्य या मछली पालने के बहुत से तरीके मौजूद हैं, लेकिन मुख्य रूप से नीचे बताए गए तकनीकों को अधिकतर इस्तेमाल किया जाता है. इनको इस्तेमाल करने का मुख्य कारण कम लागत में अधिक मुनाफा कमाना है.

  1. पिंजरा विधि (cage system)

इस तकनीक का इस्तेमाल समुद्रों, झीलों और नदियों में किया जाता है, यानी की आपको अपना पूरा व्यापार किसी नदी या समुद्र के पानी में ही करना होता है. ये मत्स्य पालन का व्यापार करने का सबसे सरल एवं फायदेमंद तरीका है. जिसमे बहुत कम लागत लगती है. इस तरीके में आपको समुद्र या नदी के पानी में ही पिंजरे नुमा जाल बिछाना होता है. लेकिन समुद्र मे इस तरीके के जाल को बिछाते समय सावधानी जरूर बर्तें.

2. कृत्रिम तालाब बनाकर (pond system)

इस तकनीक को सबसे अच्छी तकनीक माना जाता है, इसके लिए आपको कृत्रिम विधि से तालाब बनाना होता है या  फिर आप किसी पुराने तालाब का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. लेकिन इसके रख-रखाव एवं व्यापार को अच्छे से बैठाने में थोड़ा खर्च ज्यादा खर्च आ सकता है और इसमें मेहनत भी काफी लगती है. लेकिन मछलियों की पैदावार भी उच्च दर्जे की होती है, और भरपूर लाभ प्राप्त होता है.

  1. घर या बंद कमरे में मछली पालन (indoor fish farming)

आज की आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से आप अपने घर पर या किसी बंद जगह में भी मछली पालन कर सकते हैं. इसके लिए आपको तकनीक का इस्तेमाल करके मछलियों के रहने लायक वातावरण तैयार करना होता हैं. इसके लिए आपको कमरे का तापमान घटाना और बढ़ाना भी पड़ सकता है. ऐसा करने के लिए आपको कमरे में उपकरण लगाने की आवश्यकता होगी. जिनकी मदद से आप कमरे का तापमान अपने हिसाब से नियत्रंण कर सकते हैं. इस तकनीक के जरिए फिश फार्मिंग करना लाभदायक ही होता है. वहीं उचित स्थान का चयन करते समय ये जरूर देख लें की वहां पर बिजली और पानी की अच्छी सुविधा मौजूद हो.

मछली पालन करने के लाभ (Advantages of Fish Farming)

  • अभी हाल में किए गए सर्वेक्षण के मुताबिक मछली पालन करने के व्यापार में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है. ऐसा में आप इस व्यापार के जरिए अच्छा खासे पैसे हर साल कमा सकते हैं. इतना ही नहीं आप अपने इस व्यापार को विदेशों तक भी पहुंचा सकते हैं और दूसरे देशों में भी अपनी मछलियां निर्यात कर सकते हैं.
  • इस व्यापार को शुरू करने में ज्यादा खर्चा नहीं आता है और आप इसे कम लागत यानी कम पैसों में शुरू कर सकते हैं. इतना ही नहीं हमारे देश की नदियों में मछलियां बहुत अधिक मात्रा में पाई जाती हैं. ऐसे में कभी भी इस व्यापार में गिरवाट नहीं आती है.

मछली उत्पादन हेतु लाइसेंस (fish farming license)

भारत में किसी भी तरह के व्यापार को शुरू करने से पहले उसे पंजीकृत करवाना पड़ता है. अपने व्यापार को पंजीकृत करने के लिए आपको एक फार्म भरना पड़ता है. जिसे सरकार ने उद्योग आधार का नाम दिया है. आप सीधे एमएसएमई मंत्रालय के किसी भी सरकारी कार्यालय में जाकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं. जिसके लिए आपको अपने व्यवसाय सम्बन्धी सभी दस्तावेज एवं पहचान पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड एवं मालिक की फोटो आदि ले जानी होती है. आपको पंजीकरण के बाद एक पंजीयन संख्या दी जाती है. जिसका इस्तेमाल आप सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी या फिर लोन पाने के लिए कर सकते हैं. लेकिन आप समुद्र या नदी पर इस व्यापार को करना चाहते हैं तो आपको सरकार से नो ऑप्जेक्शन सर्टिफिकट लेना आवश्यक हो जाता है.

घर पर कैसे शुरू करे ये व्यापार (fish farming at home)

टब या प्लास्टिक के कृत्रिम तालाब की मदद से आप इस व्यापार को अपने घर से भी शुरू कर सकते हैं. आप ये टब या कृत्रिम तालाब को एक रूम में भी रख सकते हैं या फिर इनको आप अपने घर की छत पर भी रख सकते हैं. लेकिन ध्यान रखें की मछलियों से काफी बुरी गंध आती है. जो कि आपके घर में भी फैल सकती है और इससे आस पास के लोगों को भी समस्या हो सकती है. वहीं आपको पानी, मछलियों के खाने के सामान और मछलियों की दवाओं का भी समय-समय पर इंतजाम करना होता है. इसके अलावा टब या तलाब के पानी को हफ्ते में दो बार जरूर बदलें.

छोटे एवं बड़े स्तर पर मछली पालन (small scale and large scale Fish farming)

अगर आप इस व्यापार को छोटे स्तर पर शुरू करते हैं, तो जमीन एवं कृत्रिम तालाब या टब लेने का खर्चा बड़ जाता. अगर आपके पास जमीन है तो आप उस पर तालाब खोदकर अपना व्यापार शुरू कर सकते हैं. अगर देखा जाए तो आपकी लागत आपके व्यापार के स्तर एवं पालन करने के तरीके पर निर्भर करती है.  इसलिए अपने बजट के हिसाब से ही व्यापार करने की तकनीक का चुनाव करें. बड़े स्तर पर इस व्यापार को शुरू करने के लिए आपको अधिक जमीन और कृत्रिम तालाबों की जरूरत पड़ती है. वहीं ऊपर आपको मछली पालन करने के तीन तरीके बताए गए है. जिनकी प्रक्रिया हर स्तर पर एक जैसी ही होती है.

मार्केटिंग (Fish market)

भारत के लगभग हर शहर में मछलियों को बेचने के लिए बाजार लगाया जाता है. जहां पर आप भी जाकर अपनी मछलियां बेच सकते हैं. इतना ही नहीं भारत से मछली विदेशों में भी भेजी जाती हैं. इसके अलावा आप अपनी मछलियों को सीधे तौर पर किसी होटलों या छोटे दुकानदारों को भी बेच सकते हैं.

पैकेजिंग (Packaging)

होटलों और दुकानदारों को मछलियां बेचने से पहले आपको इनकी अच्छे से पैकिंग करनी होती है. ताकि मछलियों को सही तरह से और बिना किसी परेशानी से इन तक पहुंचाया जा सके. वहीं अगर आप अपनी मछलियों को किसी विदेश या दूसरे राज्य में बेचते हैं तो भी आपको पैकेजिंग की जरूरत पड़ती है. आप इनकी पैकेजिंग किसी भी तरह के पॉलिथीन बैग में कर सकते है और आपको ये बैग आसानी से बाजार में मिल जाएंगे.

मछली पालन में लगने वाली लागत (how much does it cost to start a fish farm)

30 से 50 हजार रुपए के बीच में आप तालाब का पूरा सेटअप तैयार कर सकते हैं. उसके बाद मछली के बीज, खाना, पानी एवं बिजली का कुल बिल मिलाकर 1 से 1.5 लाख रूपय तक का खर्चा आता है. यानी इस व्यापार को अच्छे स्तर पर शुरू करने के लिए आपको कम से कम 2 लाख रुपए की जरूरत पड़ती है.

मछली पालन से होने वाला मुनाफा (fish farming profit margin in india)

अगर आप इस व्यापार में एक लाख रुपय लगाते हैं, तो आपको कम से कम 3 गुना लाभ हो सकता है. इसके अलावा इस व्यापार में होने वाला फायदा आपकी क्षमता, कार्यशैली, एवं मार्केटिंग स्तर पर निर्भर करता है. यानी अगर आप अच्छे से मेहनत करते हैं तो आपको लाभ भी अच्छा ही होगा.

अन्य नए व्यापार शुरू करने के बारे में पढ़े:

3 comments

  1. Good information sir.

  2. मनीष कुमार

    मछली पालन पोषण और से संबंधित

  3. mughe plastic tank me fish farming krna hi loan vidhi bataye trainning kaha se mile ga iska aur kitne din ka trainning hota hai kon sa time fish farming ke liye sahi hai .

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *