Krishi Business : किसान अब सरकार को गोबर बेचकर कमा सकते हैं अधिक मुनाफा, जाने प्रक्रिया

कृषि व्यवसाय, गोधन (गौधन) न्याय योजना छत्तीसगढ़, गोबर, खाद, खरीद (Krishi Business Ideas, Gaudhan Nyay Yojana Chhattisgarh in Hindi)

गाय एक ऐसा पालतू पशु हैं जिससे कई सारे चीजें प्राप्त होते हैं जैसे कि गाय का दूध जिससे कई सारे खाद्य पदार्थ बनते है और सभी स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छे एवं लाभकारी होते हैं. इसके साथ ही आपको बता दें कि केवल गाय के दूध एवं उससे प्राप्त होने वाले खाद्य पदार्थों से ही आपको लाभ नहीं मिलता, बल्कि गाय से प्राप्त होने वाले गोबर से भी आपको बहुत फायदा मिल सकता हैं. क्योकि गाय के गोबर से लकड़ी, एवं खाद बनती हैं, जिसका सितेमल कई चीजों में किया जाता है. छत्तीसगढ़ सरकार ने पशुपालकों से गाय का गोबर खरीदने के लिए ‘गौधन न्याय योजना’ शुरू की हैं. जिसके साथ जुड़कर उनकी अच्छी खासी आमदनी हो सकती हैं. यह योजना क्या है एवं इससे कैसे लाभ मिलेगा. इसकी पूरी प्रक्रिया विस्तार से इस लेख में दी जा रही हैं, इसके साथ अंत तक जुड़े रहिये.

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गौधन न्याय योजना क्या है (What is Gaudhan Nyay Yojana)

गौधन न्याय योजना को छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने अपने राज्य के पशुपालकों के लिए शुरू करने का ऐलान किया हैं. दरअसल पशुपालक मुख्य रूप से किसान ही होते हैं. इसलिए इस योजना के तहत राज्य सरकार पशुपालन करने वाले किसानों से गोबर खरीदेगी, और उससे वर्मी कम्पोस्ट खाद का निर्माण कर सस्ते दामों में इसे वापस किसानों एवं अन्य लोगों को बेचेगी. ताकि इस खाद का इस्तेमाल पेड़ – पौधे एवं फसलें उगाने में किया जा सके.

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गौधन न्याय योजना का उद्देश्य (Objective)

गौधन न्याय योजना का मुख्य उद्देश्य हैं पशुपालन को बढ़ावा देना, पशुपालकों की आय में बढ़ोत्तरी कर उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना, गांव एवं शहरों में आवारा की तरह घूमने वाले पशुओं की सुरक्षा एवं उनका प्रबंधन करना. और इन सभी के अलावा बेहतर खाद का निर्माण कर पर्यावरण की रक्षा करना और उसे बेहतर बनाना, आदि है.

गौधन न्याय योजना क्यों शुरू की गई (Why Gowdhan Nyay Yojana was Launched)

छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री जी ने इस योजना को इसलिए शुरू किया हैं क्योकि उनका मानना है कि छत्तीसगढ़ में हमेशा से ही खुले में चराई की परंपरा रही हैं जिसके कारण फसलों को नुकसान हुआ है. साथ ही गायों को दूध देने से रोकने के बाद उन्हें ऐसे ही छोड़ दिया जाता है, जिसके कारण आवारा पशु शहरों में सड़क दुर्घटनाओं एवं जानमाल की क्षति का कारण भी बनते है. इसलिए गाय को एक लाभदायक व्यवसाय बनाने के लिए सरकार ने पशुपालकों यानि किसानों से गोबर खरीदने का फैसला लेते हुए गौधन न्याय योजना शुरू की है.

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गौधन न्याय योजना की विशेषताएं एवं लाभ (Features and Benefits)

  • छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की गौधन न्याय योजना से पशुपालन करने वाले किसानों की आय में वृद्धि की जा रही है.
  • इसके अलावा गाँव क्षेत्र में रहने वाले कई बेरोजगार लोगों के लिए रोजगार के अवसरों में वृद्धि कर लोगों को रोजगार प्रदान किया जा रहा है.
  • इस योजना के माध्यम से राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश भी की जा रही है.
  • इस योजना को लागू करने के लिये राज्य के कम से कम 2,200 गांवों में गौशालाओं का विकास किया गया है. और आने वाले कुछ महीनों में यह आंकड़ा 5 हजार के पार हो सकता है. 
  • इस योजना में गौशालाओं को आजीविका केंद्र के नाम से जाना जायेगा, जहाँ पर स्वयं सहायता समूह की महिलाon द्वारा वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण किया जायेगा.

गोबर खरीदी कब की जाएगी (When will Gobar be Purchased)

छत्तीसगढ़ राज्य सरकार पशुपालकों से गोबर की खरीदी निर्धारित दर पर जुलाई माह की 20 तारीख से शुरू करेगी. इस दिन हरेली पर्व मनाया जाना है.

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गोबर की खरीद रेट (Gobar Rate)

पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई गौधन न्याय योजना एक नई योजना हैं. इससे पहले इस तरह की कोई योजना शुरू नहीं की गई है. इसके लिए राज्य सरकार ने एक निश्चित दर का भी निर्धारण किया है. सरकार 1.5 रूपये प्रति किलोग्राम की दर से किसानों से गोबर खरीदेगी. इस दर का निर्धारण राज्य सरकार द्वारा एक समिति का गठन करके किया गया है. ये समिति में कुल 5 सदस्य शामिल थे जोकि मंत्रीमंडल से जुड़े हुए थे, जिसमें राज्य के वन मंत्री, सहकारिता मंत्री, नगरीय प्रशासन मंत्री, एवं राजस्व मंत्री आदि शामिल थे. और इसकी अध्यक्षता कृषि एवं जन संसाधन मंत्री श्री रवीन्द्र चौबे द्वारा की गई थी. हालांकि इस दर का निर्धारण समिति ने किसानों, पशुपालकों, गौशाला चलाने वाले लोगों एवं बुद्धिजीवियों से मांगे गए सुझावों को ध्यान में रखते हुए किया है. 

गौधन न्याय योजना को कैसे लागू किया जायेगा (Implementation)

सरकार ने शहर में घूमने वाले आवारा पशुओं की तादात को रोकने के लिए नगरीय प्रशासन विभाग को पूरी व्यवस्था करने का निर्देश दिया है. गाय के गोबर की खरीद, वित्तीय प्रबंधन और वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन की जिम्मेदारी विभाग की होगी. साथ ही इसकी पूरी प्रक्रिया के निर्धारण के लिए एक कमेठी का गठन भी किया जायेगा, जिसमें मुख्य सचिव की अध्यक्षता में अन्य सचिव शामिल होंगे.  

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इस तरह से अब पशुपालन का कार्य करने वाले किसानों को केवल गाय के गोबर को बेचने से अच्छी खासी आमदनी प्राप्त हो जाएगी. साथ ही आवारा घूमने वाले गायों की भी संख्या में कमी आयेगी.

एफएक्यू (FAQ’s)     

Q : गोबर की खरीद दर क्या है ?

Ans : गोबर की खरीद दर 1.5 रूपये प्रति किलोग्राम निर्धारित की गई है.

Q : गौधन न्याय योजना के तहत गोबर की खरीदी कब से की जाएगी ?

Ans : गौधन न्याय योजना के तहत सरकार द्वारा गोबर की खरीदी हरेली पर्व से की जाएगी जोकि आने वाले 20 जुलाई को ही है.

Q : गोबर की खरीद दर का निर्धारण किसने किया ?

Ans : गोबर की खरीद दर में बदलाव का निर्धारण कृषि एवं जल संसाधन मंत्री की अध्यक्षता में वन मंत्री, सहकारिता मंत्री, नगरीय प्रशासन मंत्री एवं राजस्व मंत्री की एक समिति की बैठक के दौरान किया गया है.

Q : गोबर की खरीद कैसे की जाएगी ?

Ans : राज्य सरकार ने पशुपालकों से गोबर खरीदने की जिम्मेदारी नगरीय प्रशासन मंत्री को दी है.

Q : क्या गोबर केवल गाय का ही खरीदा जायेगा ?

Ans : गौधन न्याय योजना के तहत किन – किन पशुओं का गोबर खरीदा जायेगा, इसकी जानकारी नहीं दी गई हैं. लेकिन मुख्य रूप से कहा जा रहा है कि गाय के गोबर को ही सरकार खरीदेगी. 

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