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जीएसटी क्या है व व्यापार के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया | GST and GST Registration Process for Business in Hindi

जीएसटी क्या है और बिजनेस के लिये जीएसटी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया (What is GST and GST Registration Process for Business, full form in Hindi )

जीएसटी क्या है (What is GST and GST full form)

वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Service Tax) जिससे हम सभी भली भाति परिचित है. नोटबंदी के बाद जीएसटी सरकार का दूसरा बड़ा कदम था, जिसमे सरकार का एक नारा था “वन नेशन,वन टैक्स (One Nation, One Tax)”. यही सरकार का प्रमुख उद्देश्य जीएसटी को लागू करने के लिये था. सरकार सभी छोटे-बड़े इनडायरेक्ट टैक्स को हटाकर एक टैक्स प्रणाली लागू करना चाहती थी. बहुत पुरानी टैक्स प्रणाली जो अब तक चली आ रही थी, जिसके अनुसार किसी वस्तु के निर्माण से लेकर जब तक वह ग्राहक तक नही पहुच जाती, तब तक टैक्स लगाया जाता था, पर जीएसटी लागू होने के बाद सिर्फ एक बार टैक्स लगने लगा.

GST

जीएसटी किन लोगों के लिये आवश्यक है ?

  • प्रत्येक व्यक्ति के लिये जो कि पहले से वेट, सर्विस टैक्स जैसे एक्ट मे रजिस्टर्ड हो.
  • बीस लाख से अधिक के टर्नओवर वाले व्यापार के लिये (नॉर्थ-ईस्ट, जम्मूकश्मीर, हिमाचल प्रदेश, और उतराखंड के लिये यह लिमिट दस लाख रूपये है).
  • कर योग्य व्यक्ति/ अनिवासी कर योग्य व्यक्ति, सप्लाय करने वाला एजेंट तथा इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर इत्यादि भी जीएसटी के दायरे में आयेंगे.
  • जो व्यक्ति रिवर्स चार्ज के तहद टैक्स भरता हो, और वह व्यक्ति जोकि ई-कॉमर्स सर्विस देता हो, वह भी जीएसटी के दायरे में आएगा.

व्यापार के लिए रजिस्ट्रेशन के आवश्यक दस्तावेज (Required Document for GST Registration for Business) 

जीएसटी की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन की पूरी लिस्ट दी गई है, हम यहाँ उस सूची  की मुख्य बातें यहाँ बता रहे है . किसी भी बिजनेस मे सबसे पहले हम यह देखें, कि वह बिजनेस या व्यापार किस रूप मे  किया जा रहा है जैसे-

यदि किसी व्यक्ति द्वारा जोकि स्वयं व्यापार का संचालन कर रहा है, उसे प्रोपरायटर कहा जाता है.

इसके लिए आवश्यक डॉक्यूमेंट निम्न है :

  • पेन कार्ड ऑफ प्रोपराइटर
  • फोटो
  • आधार कार्ड
  • बैंक अकाउंट
  • व्यापार के स्थान का पता (यदि स्वयं का व्यापार हो, तो प्रोपर्टी के पेपर या बिजली का बिल या अन्य कोई सरकारी कागज जोकि उस व्यक्ति के नाम हो, जिसके नाम पर व्यापार चलाना हो, और यदि वह जगह रेंट की हो, तो रेंट अग्रीमेंट/टैक्स की रिसिप्ट लगेगी.)
  • अथॉरिटी लेटर
  • डिजिटल सिग्नेचर
  • बिजनेस रजिस्ट्रेशन का प्रूफ या इनकारपोरेशन सर्टीफिकेट
  • यदि पार्टनरशिप फर्म है तो सभी पार्टनर्स की डिटेल लगेगी
  • यदि कोई कंपनी है तो डायरेक्टरस की डिटेलस लगेगी

जीएसटी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया (Registration Process for Business) :

जीएसटी में रजिस्ट्रेशन के लिए फॉर्म जीएसटी आरईजी-01 भरना होता है. इसमें पेन कार्ड बहुत जरूरी होता है, क्योंकि जीएसटी नंबर पेन बेस्ड नंबर होता है. आगे हम इसकी पूरी प्रकिया देखेंगे.

  • सबसे पहले जीसटी की ऑफिसियल वेबसाइट gst.gov.in पर जायेंगे, वहा टैक्सपेयरस (नार्मल/टीडीएस/टीसीएस) मे रजिस्टर्ड नाव पर क्लिक करेंगे. यहाँ पेन के अनुसार डिटेल भरेंगे तथा ई-मेल आईडी तथा मोबाईल नंबर डालेंगे.
  • अब ईमेल तथा मोबाईल दोनों पर अलग-अलग छ: नंबर का एक ओटीपी आयेगा, जिसे की डाल कर एनटर करेंगे. अब एक टीआरएन नंबर जनरेट होता है, जिसको डालते ही ई-मेल तथा मोबाईल पर एक ओटीपी आएगा, अब जो ओटीपी होगा, वह दोनों पर एक सा आयेगा. उसे डालते ही एक फॉर्म खुल जायेगा, जिसमे अलग पेज होंगे, जिसमे पूरी डिटेल डाल कर हर पेज पर सबंधित डाक्यूमेंट अटेच करेंगे. न्यू रजिस्ट्रेशन का फॉर्म खुलेगा, जिसमे एप्लीकेशन टाइप, ड्यू डेट ऑफ कम्पलीट,लास्ट मोडिफाइड प्रोफाइल दिया होगा. जो कि इस प्रकार होगा –
  • बिजनेस डिटेलस – बिजनेस से रिलेटेड पूरी डिटेल जिसमे ट्रेड का नाम, कांस्टीट्यूशन ऑफ बिजनेस से लेकर डिस्ट्रिक्ट की जानकारी तथा रिजन टू ओबटेन रजिस्ट्रेशन तथा किस डेट से व्यापार शुरू हुआ है, वह डालेंगे तथा इसको कंटिन्यू करेगे.
  • प्रमोटर या पार्टनर्स – प्रमोटर या पार्टनर्स की पर्सनल इन्फर्मेशन, आइडेंटिटी इन्फर्मेशन तथा रेसिडेंशियल एड्रेस फिल कर उससे सम्बंधित डाक्यूमेंट अटेच करना होता है. वही यदि पार्टनर्स है तो, सभी पार्टनर्स की पूरी डिटेल तथा उनके डाक्यूमेंट अटेच करना होता है. यहाँ लास्ट मे एक ऑप्शन आता आलसो ऑथोराइस सिगनेटरी यदि इसको सिलेक्ट करते है, तो नेक्सट पेज पूरा फिल होता है क्योंकि डिटेल्स सेम है (प्रोपरायटर के केस मे).
  • ऑथोराइस सिगनेटरी यदि ऑथोराइस सिगनेटरी अलग है, तो उसकी पूरी डिटेल्स पर्सनल इनफार्मेशन, आइडेंटिटी इन्फर्मेशन तथा रेसिडेंशियल एड्रेस फिल कर उससे सम्बंधित डाक्यूमेंट अटेच करना होता है. इसमें अथॉरिटी लेटर अनिवार्य होता है उसे अटेच करना जरुरी है.
  • ऑथोराइसड रेप्रेजेंटेटिव यदि कोई रिप्रेजेंटेटिव है, तो उसकी डिटेल फिल करेंगे.
  • प्रिंसिपल प्लेस ऑफ बिजनेस यहाँ उस स्थान की डिटेल जहा मुख्य रूप से बिजनेस हो रहा है, उसकी पूरी डिटेल फिल करेंगे, उसका एड्रेस, कांटेक्ट इन्फोर्मेशन, जगह किस रूप मे है स्वयं की , रेंट की या लीज की उसे सिलेक्ट करके डॉक्यूमेंट अटेच करेंगे. सबसे इम्पोर्टेंट इन्फोर्मेशन जिसमें बिजनेस का नेचर क्या है, वह सिलेक्ट करना है. लास्ट में यदि बिजनेस एक से अधिक स्थान पर होता है तो उसे सिलेक्ट करना है.
  • एडीशनल प्लेस ऑफ बिजनेस जो भी अतिरिक्त स्थान हो, एक या एक से ज्यादा जैसे गोडाउन,वेयरहाउस आदि उसकी डिटेल तथा उससे सम्बंधित सभी डाक्यूमेंट अटेच करना होगा.
  • गुड्स एंड सर्विसेज जिस भी वस्तु का व्यापार कर रहे है या जिसकी सर्विसेज दे रहे है, उसकी पूरी जानकारी जिसमे की एचएसएन कोड (जीएसटी मे अलग से दिये है) को सिलेक्ट करना होगा. यदि किसी वस्तु या सेवा का एचएसएन कोड नहीं मिल रहा है, तो उसे उसके नाम से नेट पर सर्च भी कर सकते है.
  • बैंक अकाउंट सबसे पहले यहाँ नंबर डालना होगा, कि आप कितनी बैंक कि डिटेल फिल कर रहे है, वैसे एक ही बैंक डिटेल डालना सही होता है. अब उसमे आप अपनी फर्म की बैंक की डिटेल डाल कर उसके डॉक्यूमेंट अटेच कर देंगे.
  • स्टेट स्पेसिफिक इन्फोर्मेशन यदि पहले से किसी अन्य में रजिस्टर्ड है, तो उस नंबर को डालेंगे.
  • वेरीफिकेशन यहाँ यह लिखा होता है आपके द्वारा दी गई सभी डिटेल सही है तथा उसकी आपको पूरी जानकारी थी तथा इसे आप सत्यापित करते है. ऑथोराइसड सिगनेटरी को सिलेक्ट कर लेंगे, फिर प्लेस फिल करेंगे तथा ईवीसी लेकर या डीएससी के द्वारा इस फॉर्म को कम्पलीट करेंगे.

यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद एक ऐआरएन नंबर जनरेट होगा, जिसके माध्यम से हम जब तक नंबर इशु नही होता, तब तक उसका स्टेट्स का पता लगा सकते है. जीएसटी नंबर हमारे ई-मेल पर आयेगा, जिसमे एक पासवर्ड भी दिया होता है, जिससे हम नया यूजर नेम तथा स्वयं का पासवर्ड क्रिएट कर लेंगे.

जीएसटी में रजिस्टर्ड नहीं करने पर पेनल्टी (Penalty for Not Registered on GST):

जब कोई व्यक्ति जीएसटी के अंतर्गत आता है तथा उसके बाद भी वह रजिस्ट्रेशन नही करता है तथा बिना रजिस्ट्रेशन के व्यापार करता है तो, उसे निम्न पेनल्टी है :

  • यदि उसने टेक्स का कम भुगतान किया है तो टेक्स का दस प्रतिशत या कम से कम दस हजार की पेनल्टी.
  • यदि बड़े रूप में टैक्स की चोरी की है सौ प्रतिशत टैक्स का चुकाना होगा.

इस प्रकार जीएसटी में रजिस्ट्रेशन बहुत आवश्यक है, जो भी उस दायरे मे आते है तथा इससे संबन्धित सभी रिटर्न भरना भी उतना ही जरुरी है. अन्यथा उस पर भी लेट फीस का प्रावधान है. सरकार ने एक कर व्यवस्था सभी की सुविधाओं को ध्यान मे रख कर करी है तो सभी को उसका पालन भी करना चाहिये जिसके कई फायदे है.

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