जूट के बैग बनाने का व्यवसाय शुरू करें

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आप आज कई तरह से बैग अपने रोज के कामो में इस्तेमाल करते होगे, जिनमें से कुछ बैग प्लास्टिक के, जूट के, कपड़े के या फिर पेपर के बने बैग होते हैं. आज हम बात करेंगे जूट के बने बैग के बारे में कि इन्हें कैसे बनाया जा सकता है और जूट के बैग का व्यवसाय कैसे शुरु किया जा सकता है? और इसमें कितनी लागत आती है? इसे शुरू करने से पहले आपको क्या-क्या करना होता है? इन सभी बातों के बारे में जानकारी आज हम आपको अपनी इस पोस्ट के जरिए प्रदान करने वाले हैं.

जूट के बैग बनाने के व्यवसाय की बाजार में मांग

आज भारत की बढ़ती जनसंख्या में ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं होगा, जो आज के समय में रोजमर्रा के कार्यों में किसी भी बैग्स का इस्तेमाल ना करता हो. चाहे वह प्लास्टिक का हो या कपड़े का, लेकिन बढ़ते पर्यावरण के हितों के कारण सिंगल यूज़ प्लास्टिक बैग बंद हो रहे हैं और कपड़े के बैग काफी महंगे पड़ते हैं, इसलिए जूट का बिजनेस फायदेमंद साबित होता है. ये कम निवेश में ज्यादा प्रॉफिट कमाने वाला बिजनेस है. यदि इस व्यवसाय को कड़ी मेहनत और लगन के साथ किया जाए, तो इस व्यवसाय का मार्किट पोटेंशियल बहुत ज्यादा बड़ा है. शुरुआत के समय अगर इसमें 40 से 50 हजार रूपए लगा दिया जाए, तो आप प्रतिवर्ष इससे कम से कम 5 से 6 लाख की आमदनी पूरे वर्ष में प्राप्त कर सकते हैं. इस विषय का मार्केट कांटेक्ट बहुत बड़ा होने का एक कारण यह भी है, कि यह व्यवसाय प्रतिवर्ष 18% की ग्रोथ से बढ़ रहा है. भारत में यह व्यवसाय अन्य व्यवसाय की तुलना में हमेशा फायदेमंद होता है, क्योंकि इस व्यापार में भारत अन्य देशों को आयात की तुलना में निर्यात ज्यादा करता है इसलिए जूट का बिजनेस एक फायदे का सौदा साबित होता है.

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जूट के बैग बनाने के व्यवसाय शुरु करने से पहले योजना बनाएं

जूट के बैग बनाने के बिजनेस की अच्छी प्लानिंग करने के लिए हमें निम्न बातों को ध्यान में रखना चाहिए –

  • जूट के बिजनेस को किस क्षेत्र में खोला जाए, किसी भी व्यवसाय में इस बात का ध्यान रखना अति आवश्यक है.
  • जूट में उपयोग होने वाले कच्चे माल को कहां से प्राप्त किया जाए. जब तक सामान कहां से प्राप्त होगा, इस बात का ज्ञान नहीं होगा, आप अपना व्यवसाय शुरू नहीं कर पाएंगे.
  • कच्चे माल को फैक्ट्री तक लाने के लिए किन साधनों का इस्तेमाल किया जाए. फैक्ट्री में कितने वर्कर्स की आवश्यकता होगी. यह सब इस बात पर निर्भर करता है, कि आप अपना काम कितने बड़े या छोटे पैमाने पर आरंभ करने वाले हैं.
  • प्रतिवर्ष जूट के उद्योग में कितनी लागत में कितना मुनाफा कमाया जाएगा. इसका एक निश्चित बजट होना चाहिए, ताकि आपके द्वारा लगाई जाने वाली धनराशि का सही इस्तेमाल हो सके और आपका व्यवसाय दिन-प्रतिदिन तरक्की करें.
  • जूट से बने बैग को किन-किन क्षेत्रों में पहुंचाना है, इस बात का विचार विमर्श करने के बाद ही योजना बनानी चाहिए, ताकि आप व्यवसाय आरंभ करते ही धनराशि प्राप्त कर सकें.
  • प्रतिदिन कितनी तरह के और कितनी संख्या में बैग्स का निर्माण किया जाएगा. इसका भी पहले से विचार करें. एक सफल व्यापार की शुरुआत एक सफल बिजनेस प्लानिंग से होती है.

जूट फाइबर से कितने प्रकार के बैग बनाए जा सकते हैं

जूट के बैग बनाने का व्यापार एक ऐसा व्यापार है, जहां पर एक निश्चित सामग्री से अनेकों तरह की वस्तुओं का निर्माण करके मुनाफा कमाया जा सकता है. जूट के कच्चे माल से हम अलग-अलग तरह के बैग और थैलियां बना सकते हैं. जूट से बनने वाले बैग्स और उनके उपयोग इस प्रकार है –

  • शॉपिंग बैग्स – जूट के इस्तेमाल से हम शॉपिंग बैग्स का निर्माण कर सकते हैं. इन बैग्स का इस्तेमाल हम मार्केट में खरीदारी करने के लिए कर सकते हैं. यह बहुत मजबूत और टिकाऊ होते हैं काफी लंबे समय तक बिना फटे काम आते हैं.
  • फैंसी हैंडबैग – जूट के द्वारा हम लेडीस के काम आने वाले फैंसी हैंडबैग का निर्माण कर सकते हैं. यह बैग्स बहुत ही गुडलुक और दिखने में आकर्षित होते हैं.
  • बॉटल बैग्स – जूट के द्वारा बोतल के बैग्स भी बनते हैं. इन बैग्स में पीने वाली पानी की बॉटल को सुरक्षा के साथ रखा जा सकता है.
  • लगेज बैग्स – कहीं पर भी घूमने जाने के लिए उपयोग में आने वाले हैं, लगेज बैग्स भी जूट के द्वारा बन सकते हैं. यह बैग्स दिखने में आकर्षक और फैंसी होते हैं. यह काफी मजबूत होने के कारण इनका इस्तेमाल भी वर्तमान समय में कुछ तेजी से बढ़ रहा है.
  • वाइन बॉटल बैग्स – किसी भी रेस्टोरेंट में और बाहर वाइन की बोतल की बिक्री के लिए जूट के बैग्स का इस्तेमाल किया जाता है. यह बैग्स दिखने में आकर्षक होने के कारण उनका रुतबा ही एक अलग होता है. आजकल वाइन की बॉटल को इन बैग्स में पैक करके बेचा जाता है.
  • मार्केटिंग बैग्स – अपने व्यापार की मार्केटिंग करने के लिए आजकल दुकानदार जूट के बैग्स पर अपने व्यापार और दुकान का नाम लिख कर कस्टमर को देते हैं. जूट बैग्स की सहायता से वे अपने व्यापार का प्रचार करते हैं. यह बैग दिखने में आकर्षक होने के कारण इनका उपयोग जनता करती है, जिससे उनके व्यापार का कम खर्चे में प्रचार हो जाता है.

इन बैग्स के अलावा जूट से अन्य प्रकार के भी बैग्स का निर्माण किया जाता है.

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जूट के बैग बनाने के व्यवसाय के लिए आवश्यक स्थान

किसी भी तरह के व्यापार को शुरुआत करने से पहले उसे किस क्षेत्र में स्थापित करना है, यह जानकारी होना अति आवश्यक है. अगर व्यापार को वहां पर स्थापित किया जाए, जहां जनसंख्या कम हो, तो आपका व्यवसाय आसानी से फल- फूल नहीं पाता है. अगर व्यापार को जनसंख्या वाले क्षेत्र में स्थापित किया जाए, तो व्यापार बहुत तेजी से बढ़ता है. अगर व्यापार को एक विकसित क्षेत्र में स्थापित किया जाए, जहां पर लोग शिक्षित हैं. तो व्यापार बढ़ने की संभावनाएं ज्यादा होती है. इसी तरह जूट के उद्योग को भी एक ऐसे क्षेत्र में खोला जाए, जहां पर रहने वाला समाज एक विकसित समाज है, तो जूट का बिजनेस आसानी से फैल जाएगा. समाज हमारे जूट से बनने वाले बैग का इस्तेमाल करेगा और आसपास की मार्केट एरिया की दुकानों में हम आसानी से अपने बैग्स का निर्यात कर पाएंगे.

इन सबके अतिरिक्त यदि आप छोटे पैमाने पर व्यवसाय आरंभ कर रहे हैं, तो उसके लिए आपको ज्यादा बड़ी जगह की आवश्यकता नहीं होगी. अनुमानित आंकड़ों के हिसाब से आप 100 से 150 गज के एरिया में अपना छोटा व्यवसाय आरंभ कर सकते हैं. वहीं यदि आप साझेदारी वाला बड़ा व्यवसाय स्थापित करने का मन बना चुके हैं, तो आपको कम से कम 500 गज से लेकर 1000 गज तक की जगह की आवश्यकता हो सकती है.   

जूट बैग बनाने व्यवसाय के लिए आवश्यक लाइसेंस और अनुमति

वैसे तो इस व्यवसाय को आरंभ करने के लिए ज्यादा कागजी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है, परंतु कुछ छोटी-मोटी प्रक्रिया का पालन करना हर व्यवसाय को आरंभ करते समय बेहद आवश्यक है :-

  • फर्म का रजिस्ट्रेशन :- सबसे पहले आप कितने पैमाने पर अपनी फर्म का आरंभ करने जा रहे हैं उसका पंजीकरण अवश्य करा लें, या तो आपकी फर्म इकाई वाली हो जिसमें आप अकेले मालिक हैं या फिर आप साझेदारों के साथ मिलकर अपनी फर्म आरंभ करना चाहते हैं तो उसी प्रकार का पंजीकरण आपको कराना होगा.
  • ट्रेड लाइसेंस :- भारतीय कानून के अनुसार किसी भी व्यवसाय को आरंभ करने के लिए ट्रेड लाइसेंस लेना आवश्यक होता है, इस व्यवसाय के लिए भी आपको पंजीकरण कराना होगा.
  • एसएसआई यूनिट :- इन सबके अलावा आपको एसएसआई यूनिट के अंतर्गत भी अपने व्यवसाय के लिए प्रमाण पत्र पाने के लिए आवेदन भरना होगा.
  • जीएसटी रजिस्ट्रेशन :- जैसा कि आप सभी जानते हैं कि देश में अब जीएसटी कानून लागू हो चुका है जिसके अनुसार किसी भी व्यवसाय के लिए जीएसटी पंजीकरण कराकर जीएसटी नंबर प्राप्त करना बेहद आवश्यक हो गया है. इसलिए आपको अपने व्यवसाय के लिए भी जीएसटी नंबर प्राप्त करना अनिवार्य है.
  • आईईसी कोड :- यदि आप अपने जूट बैग को बनाकर अलग-अलग जगहों पर निर्यात करने की सोच रहे हैं, तो उसके लिए आपको आईईसी कोड की आवश्यकता होगी. इसलिए पहले ही व्यवसाय आरंभ करते समय आईईसी कोड के लिए आवेदन अवश्य भर दें.

जीएसटी न केवल व्यापार रजिस्ट्रेशन करने के लिए है, बल्कि आप जीएसटी सुविधा केंद्र खोलकर 30 हजार रूपये प्रतिमाह तक की कमाई भी कर सकते हैं. यह कैसे होगा जानने के लिए यहाँ क्लिक करें.

जूट के बैग बनाने के व्यवसाय के लिए कच्चे माल

जूट का व्यापार एक ऐसा व्यापार है, जहां पर कच्चे माल की आवश्यकता सबसे ज्यादा पड़ती है. बिना कच्चे माल के इस व्यापार की शुरुआत करना नामुमकिन है. जूट के व्यापार में सबसे पहले कच्चे माल को किस क्षेत्र से लाना है और कच्चा माल भी एकदम फ्रेश और सुव्यवस्थित हो यह सुनिश्चित होना चाहिए, जिससे अच्छे तरीके से और आसानी से बैग्स का निर्माण किया जा सके. जूट के व्यापार में कच्चे माल के रूप में कपास का पट्ठा, जूट के रैसे, फैब्रिक कलर, फैब्रिक रोल, ड्रास्ट्रिंग इस्तेमाल किया जाता है.

जूट के बैग बनाने के व्यवसाय में आवश्यक मशीनरी

जूट बैग के उद्योग में सबसे अधिक कार्य मशीनरी का होता है, और इसमें सबसे ज्यादा खर्चा मशीनरी का ही आता है. जूट के उद्योग में निम्न मशीनरी की आवश्यकता पड़ती है.

  • जूट बैग बनाने के लिए सबसे पहले हमें कपड़े काटने की मशीन चाहिये होती है.
  • उसके बाद हैवी ड्यूटी सिलाई मशीन की आवश्यकता होती है, जिससे आसानी से जूट के कपड़े की सिलाई की जा सके.
  • इसके लिए एक छोटी साधारण सिलाई की मशीन भी जरूरी होती है, ताकि छोटी मोटी सिलाई का काम साधारण सिलाई की मशीन पर किया जा सके.
  • मुद्रण रंग पेंट के लिए स्टैंसिल उपकरण की आवश्यकता भी होती है, ताकि उससे किसी भी प्रकार का डिजाइन जूट पर बनाया जा सके.
  • लॉकस्टिच मशीनों की आवश्यकता भी जूट बैग बनाने के लिए सहायक होती है, क्योंकि उसमें जूट बैग की सिलाई लगाने के बाद उसमें लॉक लगाने की आवश्यकता होती है, ताकि बाद में वह सिलाई खुल ना जाए और थैली फट ना जाए.
  • व्यवसाय में हमें बुना बोरी बैग काटने की मशीन की भी आवश्यकता होती है.
  • मशीनरी भाग में एक साइड सील मशीन का होना भी अनिवार्य है.

भारी मशीनों के अलावा जूट बैग के व्यवसाय में कुछ छोटे उपकरणों की भी आवश्यकता होती है, जैसे :-

  • कॉटेज स्टीमर
  • कटिंग टेबल
  • डाई पेस्ट स्टिरर
  • रबड़ वाइपर
  • कैंची
  • मापने के लिए इंच टेप और अन्य उपकरण.

जूट के बैग बनाने के व्यवसाय को आरंभ करने के लिए लागत

जूट के बैग बनाने का व्यापार लागत में बहुत ही सस्ता और ज्यादा मुनाफा देने वाला व्यापार होता है. जूट का व्यापार का ज्यातर खर्चा उसकी मशीनरी खरीदने में ही होता है. अन्य खर्च कच्चे माल खरीदने, मार्केटिंग करने के तरीके और तैयार माल को पहुंचाने में ही आता है. अगर फैक्ट्री में वर्कर्स है तो उनकी सैलरी भी देनी होती हैं इसलिए हमेशा फैक्ट्री में वर्कर्स की संख्या कम ही रखें. जूट का व्यापार 45,000 रूपये में शुरू हो जाता है, किन्तु अगर आपके पास 45,000 रूपये ना हो, तो सरकार आपको मुद्रा लोन के जरिए कैश उपलब्ध करा सकती हैं. आपको यह लोन बिना कोई रिस्क चार्ज पर मिलता है, इस तरीके से आप एक नए व्यापार का आरम्भ कर सकते हैं और बहुत ही कम ब्याज देकर पैसे वापस कर सकते है.

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जूट के बैग बनाने का तरीका

  • सबसे पहले जूट के रेसो को अच्छी तरीके से साफ कर ले. आप जूट के रोल को फाइबर रॉल के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं या जूट का कपड़ा सीधे मार्केट से भी खरीद सकते हैं.
  • जूट का कपड़ा मार्केट से खरीदने पर बहुत ज्यादा महंगा पड़ता है, इसके लिए आप जूट का कपड़ा बनाने वाली मशीन भी अपनी फैक्ट्री में लगा सकते हैं, जिससे आपको कम लागत लगेगी.
  • कपड़ा खरीदने या तैयार हो जाने के बाद आप किसी भी प्रकार का बैग अपनी फैक्ट्री में बना सकते हैं और प्रिंटिंग प्रेस में रखकर उस पर किसी भी प्रकार का प्रिंट भी छपवा सकते हैं. छपवाने के बाद उसे अच्छी तरीके से सूरज की रोशनी में सूखने के लिए छोड़ दें. इस प्रक्रिया में अधिक खर्चा नहीं आता है.
  • सूखने के बाद उसे किस तरह का आकार देना है या फिर किस तरह का बैग बनाना है, उस आकार में कपड़े को केची की सहायता से काट ले और हैवी मशीन की सहायता से वहां पर अच्छी तरीके से टाके लगा लें.
  • अगर बैग पर कोई भी फैंसी आइटम लगाना ,है तो वह अन्य लॉजिस्टिक मशीन की सहायता से लगा सकते हैं.
  • उसके बाद आपको मैनुअली रूप से बांस की सीढ़ी या अन्य आवश्यकता अनुसार आइटम को लगाना होता है.
  • इसके बाद यह बैग बाजार में बिकने के लिए तैयार होता है. आप एक अच्छा डिजाइन तैयार करके उस पर एक अच्छी कीमत प्राप्त कर सकते हैं.

जूट बैग कहां पर और किस तरह बेचे जा सकते हैं

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, कि हम अपने बैग्स को किस क्षेत्र में किस तरीके से और कहां पर बेचे. हमें अच्छी तरीके से पता होता है, कि जूट बैग्स का इस्तेमाल मार्केट एरिया में ज्यादा किया जाता है. हमें ज्यादा कोशिश अपने बैग को मार्केट एरिया में बेचने की करनी चाहिए. हमें मार्केट एरिया के दुकानदारों के साथ अच्छे संबंध स्थापित करने चाहिए, ताकि हम अपने बैग्स को आसानी से बेच सकें. हमें बैग्स की एक निश्चित कीमत रखनी चाहिए, ताकि किसी भी दुकानदार के साथ मोलभाव करने में कोई भी समस्या ना आए. प्रतिवर्ष किसी भी दुकानदार के द्वारा अगर अच्छी संख्या में बैग्स खरीदे जाएं, तो हमें उस दुकानदार को प्रतिवर्ष एक सुंदर और फैंसी जूट का लगेज बैग गिफ्ट करना चाहिए, उस बैग पर हमारे कंपनी का लोगो हो. इस तरह की चीजें करने से व्यापारी भी खुश हो जाता है और हमारे व्यापार की अच्छी छवि पेश होती हैं.

जूट के बैग बनाने के व्यवसाय की मार्केटिंग

अच्छे व्यापार को विकसित करने के लिए उसकी मार्केटिंग करना जरूरी होता है. हम चाहते हैं कि हमारा जूट का व्यापार अच्छी तरीके से फैले, तो हमें उसकी पहले मार्केटिंग करना जरूरी है. मार्केटिंग के रूप में आप पैमलेट को छापकर प्रत्येक दुकानदारों को दें और बड़े-बड़े होर्डिंग लगाकर उसका प्रचार करना जरूरी होता है. अगर आप जूट से बने फैंसी बैग्स का निर्माण करते हैं तो आपको प्रत्येक घर में जाकर फैंसी बैग को दिखाना भी चाहिए.

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जूट के बैग बनाने के व्यवसाय में लाभ

जूट के बैग बनाने का व्यापार अन्य व्यापार की तुलना में बहुत ही सस्ता पड़ता है. जूट का व्यापार का सालाना खर्च 40 से 50 हजार रूपये का ही होता है, मात्र इतने रुपयों में हम प्रतिवर्ष 4 से 5 लाख रुपए तक कमा सकते हैं. अगर हम एक बड़े क्षेत्र में अपने व्यापार को विकसित करना चाहते हैं, तो इससे अधिक मात्रा में पैसा कमाया जा सकता है. यह एक अच्छा गृह उद्योग भी हो सकता है.

जूट के बैग बनाने का व्यापार बड़ी ही आसानी से शुरु किया जा सकता है. व्यवसाय को आरंभ करते समय जानकारी हासिल करके यदि आप किसी भी व्यवसाय को आरंभ करते हैं, तो उसमें आपको सफलता अवश्य मिलती है. यदि नासमझी से किसी व्यवसाय को आरंभ किया जाए, तो वह व्यवसाय हमेशा नुकसान ही दिलाता है. अगर आपके आसपास या कोई दोस्त इस व्यापार को करता है, तो आप उससे अवश्य संपर्क करें.

FAQ

Q : पूरी दुनिया में ऐसा कौन सा देश है जो सबसे ज्यादा जूट का उपयोग करता है और निर्माण करता है?

Ans : पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा जूट का निर्माण करके इस्तेमाल करने वाले कुछ ही देश है, जिनमें सबसे नंबर वन पर हमारा भारत देश शामिल है. उसके बाद बांग्लादेश, चाइना और थाईलैंड इस लिस्ट में शामिल होते हैं. भारत एक अकेला ऐसा देश है जो बड़े पैमाने पर कच्चा जूट का उत्पादन करके पूरे विश्व में उसका निर्यात करता है.

Q : एक जूट की पैदावार के लिए किस तरह का मौसम आवश्यक होता है?

Ans : जूट की पैदावार के लिए आवश्यक मौसम के बारे में जानकारी इस प्रकार है –
1. सर्वप्रथम जूट की खेती के लिए सूर्य का 25 डिग्री तक तापमान की आवश्यकता होती है.
2. उसके बाद जूट की खेती के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है वर्षा, जो कि 150 सेंटीमीटर से लेकर 200 सेंटीमीटर तक होनी आवश्यक है.
3. जूट की खेती के लिए एक आदर्श मिट्टी की आवश्यकता होती है क्योंकि इसकी खेती के लिए दोमट मिट्टी के साथ जलोढ़ मिट्टी जो नदी के बेसिन के पास उपलब्ध हो, उसमें ही इसकी खेती की जा सकती है.
4. इस खेती को सफल बनाने के लिए एक सादी व कोमल भूमि की आवश्यकता होती है इसकी खेती कम भूमि पर भी की जा सकती है.

Q : क्या जूट से बनी वस्तुएं दोबारा नवीकरण करके इस्तेमाल की जा सकती हैं?

Ans : जूट पूरी तरह से एक बायोडिग्रेडेबल संसाधन है जिसका एक बार इस्तेमाल करने के बाद दोबारा से नए रूप में बदलकर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसे आसानी से प्राप्त भी किया जा सकता है और यह प्रकृति के लिए बिल्कुल भी हानिकारक नहीं है.

Q : जूट से बनी वस्तुओं से हमें क्या फायदे मिलते हैं?

Ans : जूट से बनी वस्तुओं से हमें निम्न फायदे मिलते हैं –
1. जूट से बनी वस्तुएं वायु को शुद्ध करने का काम करती हैं.
2. प्रकृति को प्रदूषित रहित रखने और संरक्षित करने में जूट बैग या जूट से बनी चीजें बेहद सहायक है.
3.सबसे अधिक यह उन लोगों के लिए फायदेमंद साबित होती है जो पिछड़े ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं और उनकी स्थिति बेहद खराब है.
4. जूट की खेती करने से मृदा की उपजाऊता बनी रहती है और मिट्टी की उर्वरता में जूट की सहायता से बढ़ोतरी होती है.
5. कपास की तुलना में जूट का उत्पादन स्तर कहीं मात्रा में अधिक है.

Q : भारत में सबसे पहली जूट मिल की स्थापना किस समय हुई?
 

Ans : भारत में पहली जूट मिल की स्थापना 1855 में कोलकाता के पास, बंगाल में हुगली नदी के तट के किनारे मिश्र जॉर्ज ऑकलैंड द्वारा की गई थी. जॉर्ज ऑकलैंड यूके से जूट कटाई की मशीन अपने साथ लेकर आए थे, जिन्होंने 1959 में पहला ऐसा बुनाई कारखाना स्थापित किया था जहां पर सभी मशीनें बिजली से चलती थी.

Q : जूट कपड़ा कैसे बनाया जाता है?
 

Ans : जूट को कपड़े में बदलकर, जूट का फाइबर्स स्टेम और उसका रिबन उसकी बाहरी त्वचा से अलग किया जाता है यह सब प्रक्रिया जूट संयंत्र द्वारा की जाती है. निकाले गए उस तंतु को रिकॉर्डिंग कहा जाता है रिकॉर्डिंग में सब जनों को एक साथ बांध दिया जाता है और धीमी गति से बहते हुए पानी में विसर्जित करना होता है. इस पूरी प्रक्रिया के बाद ही जूट का कपड़ा प्राप्त होता है.

Q : जूट कितने प्रकार के पाए जाते हैं?

Ans : मुख्य रूप से भारत, बांग्लादेश, थाईलैंड, चीन, दक्षिण एशिया और ब्राजील जैसे देशों में दो प्रकार के जूट पाए जाते हैं जिसमें से एक सफेद जुट जिसे कोरचोर कैप्सूलरिज कहा जाता है. दूसरे प्रकार का जूट डार्क जूट होता है जिसे टॉस या कोरचोर ओलिटोरियस कहा जाता है.

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