किसानों के लिए है मालामाल बनने का बेहतरीन अवसर, काले गेहूं की खेती का व्यवसाय दे सकता है सोने जैसी कमाई, जाने पूरी प्रक्रिया

काले गेहूं की खेती कैसे करें, कहाँ होती है (Black Wheat ki Kheti, Benefits, Seed, Uses, Origin, Price Flour in Hindi)

दोस्तों आपने गेहूं को हमेशा पीले या हल्के भूरे रंग का देखा होगा लेकिन क्या आपको पता हैं गेहूं काले रंग के भी होते हैं. जी हां इसे एक खास क़िस्त की खेती के माध्यम से उगाया जाता है. इसमें सामान्य गेहूं की तुलना में पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होती हैं. भारत में वैसे इस तरह के गेहूं की खेती नहीं होती थी, किन्तु पिछले कुछ सालों से इसकी खेती कुछ राज्यों में की जा रही हैं. गेहूं की इस नस्ल में अधिक पोषक तत्व होने के कारण लोग इसकी मांग बाजार में ज्यादा कर भी रहे हैं. इसलिए काले गेहूं की खेती किसानों को मालामाल बना रही है. यदि आपको भी खेती करने का शौक हैं तो काले गेहूं की खेती करें इससे बहुत जल्दी आपको बहुत अधिक पैसा कमाने का मौका मिल जायेगा. आइये जानते हैं किस तरह से आप काले गेहूं की खेती कर सकते हैं और मालामाल बन सकते हैं.

black wheat kheti

काले गेहूं किस प्रकार के होते हैं (What is Black Wheat)

काले गेहूं का रंग काला होता है. साथ ही जब यह उगता हैं तो उगते समय इसकी बालियाँ आम गेहूं की तरह ही हरे रंग की होती है. इसके बाद जब ये पकने लगते हैं तो इनके दानों का रंग धीरे – धीरे काला होने लगता है. इसकी रिसर्च पंजाब के मोहाली स्थित नैशनल एग्री फ़ूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टिट्यूट यानि नाबी द्वारा की गई है. वहां के डॉक्टर्स काले के अलावा नीले एवं जामुनी रंग के गेहूं की किस्म को भी विकसित कर चुके हैं. काले गेहूं के इस आश्चर्यजनक रंग का कारण इसमें पाया जाने वाला एक खास किस्म का पिगमेंट होता हैं जिसे एंथोसायनिन नाम से जाना जाता है.

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एंथोसायनिन की खास बात क्या है

एंथोसायनिन की खास बात यह है कि किसी खाद्य पदार्थ जैसे फल, सब्जी या अनाज में जब इसकी अधिकता होती है, तो यह उसका रंग गहरा कर देता है. यह एक तरह का नेचुरल एंटी ओक्सिडेंट भी होता है जोकि स्वस्थ्य के लिए काफी लाभकारी होता है. सामान्य गेहूं में इसकी मात्रा केवल 5 पीपीएम होती हैं लेकिन काले रंग के गेहूं में इसकी मात्रा 100 से 200 पीपीएम तक होती है.

काले गेहूं से सेहत को होने वाले लाभ (Black Wheat Health Benefit)

  • गेहूं की इस किस्म में एंथोसायनिन के अलावा प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं जैसे कि जिंक, आयरन, प्रोटीन एवं स्टार्च आदि. आयरन अकेला ही 60 % तक इसमें पाया जाता है. जबकि अन्य में गेहूं में सामान्य पोषक तत्व निहित होते हैं.
  • काले रंग के गेहूं में अधिक पोषक तत्व होने की वजह से यह बड़ी बीमारियों से रक्षा करता है. जैसे कि कैंसर, डायबटीज, तनाव, दिल की बीमारी, मोटापा आदि.

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काले गेहूं का आटा बेचने वाली कुछ वेबसाइट (Websites)

काले गेहूं का आटा कुछ ई – कॉमर्स साईट के माध्यम से भी बेचा जा रहा है. इस तरह के गेहूं का आटा बेचने वाली साइट्स में इसका दाम 2 हजार रूपये प्रतिकिलो से लेकर 4 हजार रूपये प्रतिकिलो तक निर्धारित किया गया है.

काले गेहूं की खेती कैसे की जाती है (How is Black Wheat Cultivated)

काले गेहूं की खेती सामान्य गेहूं के तरह ही की जाती हैं, और इसे करने के लिए बीज की बुवाई को निश्चित समय और साथ ही पर्याप्त नमी की आवश्यकता होती है, ताकि उपज अच्छे से हो सकें. गेहूं की बुवाई यदि सीडड्रिल से की जाती हैं तो इससे उर्वरक एवं बीज दोनों की बचत होती है. इसकी उपज भी सामान्य गेहूं से अधिक होती है, जोकि 10 से 12 क्विंटल प्रति बीघा है. यदि आप काले गेहूं की बुवाई लाइन लगाकर करते हैं तो इसका सामान्य दाना 100 किलोग्राम और मोटा दाना 125 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग होता हैं, और यदि छिड़काव के रूप में बुवाई करते हैं तो सामान्य दाना 125 किलोग्राम एवं मोटा दाना 150 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग होता है. काले गेहूं की बुवाई करने से पहले इसका जमाव प्रतिशत देख लें, यह सुविधा राजकीय अनुसंधान केंद्र द्वारा मुफ्त में प्रदान की जाती हैं. बुवाई के समय आप यह भी देख लें कि यदि बीज का अंकुरण धीमी गति से हो रहा हैं, तो आप बीजों की संख्या बढ़ा दें. यदि आप इसकी बुवाई ऐसे क्षेत्र में करते हैं जहाँ सिंचाई सीमित होती हैं, तो इसे रेज्ड वेड विधि के द्वारा बोना चाहिये. इस विधि में सामान्य दाना 75 किलोग्राम एवं मोटा दाना 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से इस्तेमाल होता है.

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काले गेहूं के उर्वरक एवं सिंचाई (Sinchai)                             

काले गेहूं की खेती आपको जिस क्षेत्र में करनी हैं उस क्षेत्र की आपको पहले तैयारी करनी होती हैं. इसके लिए आपको एक एकड़ जमीन में कम से कम 10 किलो जिंक सल्फेट, 45 किलो यूरिया, 20 किलो म्यूरेट पोटाश और साथ में 50 किलो डीएपी खाद को ड्रिल के माध्यम से डालना होता है. पहली सिंचाई के समय यदि आप 60 किलो यूरिया डालते हैं तो भी सही हैं लेकिन इसे बुवाई के 3 सप्ताह पहले डालें. इसके बाद सिंचाई फुटाव के समय, गांठे बनते समय, बालियाँ निकलने से पहले, इसकी दुधिया होने की दशा में और जब दाना पकने लग जाये, उस दौरान भी सिंचाई करनी आवश्यक है. इससे काले गेहूं की उपज बहुत अच्छी होती हैं.  

काले गेहूं की खेती अगर आप करते हैं तो इससे आपको बहुत अधिक मुनाफा हो सकता है, क्योकि यह काफी महंगे दाम में बाजार में बिकती हैं. और इसमें पोषक तत्वों की अधिकता होने के कारण लोग इसे अधिक खरीदते भी हैं. आने वाले समय में इसकी मांग और अधिक बढ़ सकती हैं, इसलिए आप काले गेहूं की खेती कर बने मालामाल.      

एफएक्यू (FAQ ‘s)  

Q : काले गेहूं कैसे होते हैं ?         

Ans : काले गेहूं काले रंग के होते हैं जिसमें एंथोसायनिन नाम का पिगमेंट पाया जाता है. इसकी मात्रा अधिक होने से फल, सब्जी एवं अजान नीले, बैंगनी या काले रंग के हो जाते हैं.

Q : काले गेहूं का भाव क्या है ?

Ans : काले गेहूं का भाव सामान्य गेहूं की तुलना में अधिक होता है काले गेहूं प्रति क्विंटल 3500 से 4000 रूपये में बिकते हैं, जबकि सामान्य गेहूं लगभग 1800 से 2100 रूपये प्रति क्विंटल में बेचा जाता है.

Q : काले गेहूं की खेती कहां होती है ?

Ans : काले गेहूं की खेती रिसर्च नेशनल एग्री फ़ूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टिट्यूट नाबी मोहाली पंजाब में सबसे पहले की गई थी, जिसे अब यूपी एवं मध्यप्रदेश जैसे कुछ अन्य राज्यों में भी की जाने लगी है.

Q : काले गेहूं की खेती कैसे होती है ?

Ans : काले गेहूं को साधारण गेहूं की तरह ही बो कर उगाया जाता है. इसकी उपज 10-12 क्विंटल प्रति बीघा होती है.

Q : सबसे अच्छा गेहूं कौन सा है ?

Ans : सबसे अच्छे गेहूं की बात करें तो पौष्टिक गेहूं के रूप में ‘पूसा यशस्वी’ नाम का गेहूं सबसे अच्छा होता है.

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