कुल्हड़ बनाने का व्यवसाय शुरू करें |Kulhad Making Business Ideas In Hindi

कुल्हड़ बनाने का व्यवसाय, मशीन, तरीका, विधि, कीमत, चाय (Kulhad Making Business, Mitti, Machinery, Chai, Price, Process, Size, Cost, Profit, in Hindi)

आज से पहले जब आधुनिक जमाना नहीं था और टेक्नोलॉजी का विकास नहीं हुआ था, तब लोग अपने खाने-पीने एवं अन्य जरूरी कार्यों को करने के लिए मिट्टी के बर्तनों का ही इस्तेमाल किया करते थे. जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी का विकास होता गया, वैसे-वैसे मिट्टी के बने पात्रों का इस्तेमाल भी लोग करना भूलने लगे. इसके स्थान पर चाय से लेकर लस्सी पीने के लिए लोग प्लास्टिक के या फिर शीशे के गिलास का इस्तेमाल करने लगे. लेकिन आपको बता दें कि ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते है. खाने पीने के लिए यदि हम मिट्टी के बने पात्रों का इस्तेमाल करें तो हमारा स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है, क्योंकि मिट्टी के बने बर्तनों में किसी भी चीज का सेवन करने से उसका पोषक तत्व मरता नहीं है. हमारे देश की सरकार भी मिट्टी के बने बर्तनों का इस्तेमाल करने के लिए जोर दे रही है. आइए इस लेख के माध्यम से इस व्यवसाय के बारे में विस्तार पूर्वक जानते हैं.

कुल्हड़ बनाने का व्यवसाय

कुल्हड़ के विभिन्न आकार (Size of Kulhad)

कुल्हड़ में ज्यादातर लोग चाय, दूध और ऐसे ही कुछ पेय पदार्थों को पीने के लिए इसे इस्तेमाल में ले सकते हैं. कुल्हड़ में एक तरफ जहाँ चाय पीने से चाय का स्वाद बढ़ जाता है. तो वहीं कुल्हड़ में दूध पीने से अनेकों फायदे होते हैं. इसके अलावा लस्सी पीने का मजा तो केवल मिट्टी के बने हुए बड़े साइज के कुल्लड़ में ही आता है, क्योंकि इसमें लस्सी पीने से लस्सी की तराई नहीं जाती है और हमें ठंडक के साथ-साथ इसका एक अलग स्वाद भी मिलता है.

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कुल्हड़ बनाने के व्यवसाय की बाजार में मांग

जब हम बाहर जाते हैं, जैसे रेलवे स्टेशन, घूमने फिरने की जगह इत्यादि ऐसे में हमने देखा है कि लोग चाय और लस्सी के अलावा अन्य तरल पदार्थों का सेवन करने के लिए प्लास्टिक के बने हुए बर्तनों का इस्तेमाल करते हैं. और फिर पानी, लस्सी या चाय पीने के बाद वे सभी प्लास्टिक के बने हुए बर्तनों को इधर-उधर फेंक देते हैं. प्लास्टिक कभी भी खत्म नहीं होता और यह हमारे वातावरण को भी प्रदूषित करता है. इन सभी चीजों के कारण सरकार ने अब प्लास्टिक के बने हुए चीजों पर रोक लगा दी है और सभी नागरिकों को कहा है कि ज्यादातर वे मिट्टी के बने हुए कुल्हड़ आदि बर्तनों का ही प्रयोग करें. ऐसे में यदि हम इस दृष्टिकोण से देखें तो आज के समय में कुल्हड़ का व्यवसाय करना कम लागत और अधिक मुनाफे वाला सिद्ध हो सकता है. इसीलिए आज के समय में कुल्हड़ व्यवसाय के लिए काफी मांग बढ़ गई है.

कुल्लड़ बनाने के व्यवसाय में लगने वाला कच्चा माल (Required Raw Material)

मिट्टी के कुल्लड़ बनाने के लिए आपको सबसे पहले एक अच्छी क्वालिटी की मिट्टी चाहिए होती है. जिसका प्रयोग आप कुल्हड़ बनाने में करते हैं. आप अच्छी क्वालिटी की मिट्टी को अपने नजदीकी नदी या फिर तलाब जैसे क्षेत्रों से प्राप्त कर सकते हैं. आपको कुछ कुल्लड़ बनाने के लिए साचें की भी जरूरत पड़ेगी. आप इसको मार्केट से आसानी से प्राप्त कर सकते हैं और यह ज्यादा महंगा भी नहीं मिलता है. आप अपने कुल्हड़ बनाने की क्वांटिटी के हिसाब से इसे मार्केट से खरीद सकते हैं. इसके अतिरिक्त आपको कुल्लड़ को पकाने के लिए और फाइनल रूप देने के लिए एक बड़े आकार की भट्टी का भी निर्माण करना पड़ेगा. जिसमें आप अपने कुल्लड़ को आकार देने के बाद उसमें डाल कर कुल्लड़ को पकने के लिए छोड़ देंगे.

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कुल्हड़ बनाने के लिए आवश्यक मशीनरी (Required Machinery)

कुल्हड़ का व्यवसाय शुरू करने के लिए सबसे पहले आपको इस व्यवसाय से जुड़ी हुई मशीनी यंत्रों की आवश्यकता पड़ सकती है. किसी भी मशीन द्वारा किया गया कार्य जल्दी और स्पष्टता पूर्ण होता है. आप कुल्हड़ व्यवसाय एक अच्छे स्तर पर करना चाहते हैं, तो आपको आपके नजदीकी मार्केट में अनेकों प्रकार की कुल्हड़ बनाने की मशीन भी बड़ी ही आसानी से और कम दामों पर मिल जाएगी. आप अपने सुविधा और अपने बजट के अनुसार इसका चयन कर सकते हैं.

कुल्हड़ बनाने के व्यवसाय के लिए सरकारी योजना का लाभ

हमारे देश की सरकार मिट्टी से बने हुए बर्तनों का इस्तेमाल करने के लिए अपने नागरिकों पर अत्यधिक जोर दे रही है. प्लास्टिक के बर्तनों का उपयोग करने से हमारा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण दोनों खराब होता है. इसलिए हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने सभी कुम्हारों के लिए कुंभार सशक्तिकरण योजना की शुरूआत की है. इस योजना के अंतर्गत सभी कुम्हार का काम करने वाले व्यक्तियों को इलेक्ट्रॉनिक चाक का वितरण किया जाता है. इसके अतिरिक्त भारत सरकार का दावा है, कि अनेकों प्रकार के मिट्टी के बने बर्तनों को अच्छे दाम पर कुम्हार से लोग खरीदेंगे. इस दृष्टिकोण से आज के समय में कुल्हड़ का व्यवसाय करना काफी लाभकारी और कम खर्चे वाला हो सकता है. क्योंकि स्वयं हमारे देश के सरकार ऐसे लोगों को सहायता प्रदान कर रही है.

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कुल्हड़ बनाने के व्यवसाय के लिए आवश्यक लाइसेंस (License)

जिस प्रकार से हमें किसी अन्य प्रकार के व्यवसाय को शुरू करने के लिए उससे संबंधित सरकार से लाइसेंस प्राप्त करना आवश्यक होता है, उसी प्रकार हमें इस व्यवसाय के अंदर एक ट्रेड लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है. इसके अलावा आपको अपने व्यवसाय को एमएसएमई के तहत भी रजिस्टर कर लेना चाहिये, इससे आपको व्यवसाय शुरू करने में फायदा मिल सकता है.

कुल्हड़ बनाने के व्यवसाय के लिए आवश्यक स्थान (Required Location)

मिट्टी से बने कुल्हड़ का व्यवसाय शुरू करने के लिए आपको किसी भी प्रकार के विशेष जमीनी क्षेत्र की आवश्यकता नहीं होती है, परंतु आपको एक ऐसा लोकेशन चुनना है, जहां पर आपके कुल्लड़ को धूप में सुखाने के लिए जगह मिल जाए और वहां पर अच्छी मात्रा में सूर्य का प्रकाश भी मौजूद हो. जितना अच्छा सूर्य का प्रकाश आपके कुल्लड़ पर पड़ेगा, उतना ही अच्छे तरीके से आपका कुल्हड़ जल्दी सूख कर बिकने के योग्य हो जाएगा. आप अपनी सुविधा अनुसार किसी भी लोकेशन का चयन कर सकते हैं और अपने इस व्यवसाय को बड़ी आसानी से शुरू कर सकते हैं.

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कुल्हड़ बनाने का तरीका (Kulhad Making Process)   

  • कुल्हड़ बनाने के लिए आपको सबसे पहले एक अच्छी क्वालिटी की मिट्टी की आवश्यकता होगी. मिट्टी को प्राप्त करने के बाद आपको उस मिट्टी को बारीक गेहूं के आटे के समान किसी मशीनी यंत्र की सहायता से उसे पीस लेना है. वे पूरी तरह से जब आपको आटे के समान लगने लगे तब आपको उसे छोड़ देना है. अब आपको कुल्लड़ बनाने के लिए एक मशीन और कुछ सांचे की आवश्यकता पड़ेगी. पानी और मिट्टी को एक साथ गूथने के बाद में गूथी हुई मिट्टी को सांचे में डालना है और फिर मशीन की सहायता से इसे एक अच्छा सा आकार दे देना है.
  • आपके सांचे में से आसानी से कुल्लड़ बाहर निकल जाए इसके लिए आपको इसके अंदर तेल या फिर पाउडर का इस्तेमाल करना है, जिससे आपका कुल्लड़ सुरक्षित रूप से सांचे से बाहर आ जाएगा. आप अपनी कुल्लड़ का साइज अपने सांचे के अनुसार ही रख सकते हैं. उदाहरण के तौर पर यदि आप का सांचा 200 मिलीलीटर का है, तो आपका कुल्हड़ भी 200 मिलीलीटर का ही बनेगा. मार्केट में आपको अलग-अलग साइज के सांचे मिल जाएंगे. मिट्टी को कुल्लड़ का आकार देने के बाद इसे धूप में कम से कम जब तक यह सुख नहीं जाता है, तब तक इसे वैसे ही छोड़ देना है.
  • कुल्हड़ को अंतिम रूप देने के लिए आपको एक भट्टी की आवश्यकता पड़ेगी. आप अपनी सुविधा के अनुसार भट्टी का निर्माण स्वयं ही कर सकते हैं. जब आपको लगने लगे, कि आपका कुल्लड़ धूप में पूरी तरह सूख कर तैयार हो चुका है, तब आपको इस भट्टी में अपने कुल्लड़ को डालकर पकाना होगा. भट्टी में कुल्लड़ को पकाने के लिए आपको भट्टी को जलाने के लिए कुछ बुरादा भी चाहिए होगा, आप आग जलाने के लिए किसी भी बुरादे का इस्तेमाल कर सकते हैं, और आपको यह सस्ते दामों पर लड़की के टाल या फर्नीचर का काम करने वाली दुकानों में उपलब्ध हो जायेगा.
  • जब आपको लगने लगे, कि आपके कुल्हड़ का रंग धीरे-धीरे पूरी तरह से बदल गया है, तब आपको अपने कुल्लड़ को भट्टी के अंदर से निकाल लेना है. इतनी प्रक्रिया को करने के बाद आपका कुल्हड़ बाजार में बिकने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाता है.

कुल्हड़ की पैकेजिंग (Kulhad Packaging)

यदि आप अपने द्वारा बनाए गए कुल्हड़ को दूर-दूर तक बेचने के लिए सप्लाई करते हैं, तो आपको इसकी सुरक्षा के लिए अच्छी पैकेजिंग भी करनी आवश्यक है, जिससे आपका कुल्हड़ सही स्थान पर सुरक्षित रूप में पहुंच जाए. पैकेजिंग करके आप अपने कुल्लड़ को सुरक्षित रख सकते हैं और इसे एक अलग ब्रांडिंग की तरह बाजार में बेच सकते हैं. यदि आप अपने कुल्हड़ को दूर-दूर तक नहीं सप्लाई करते हैं और अपने नजदीक के ही मार्केट में इसे बेचते हैं. तो आपको किसी विशेष प्रकार के पैकेजिंग की आवश्यकता नहीं पड़ेगी. आपका कुल्हड़ यदि अच्छा होगा, तो बिना पैकेजिंग के भी अच्छे दामों में बिक जाएगा.

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कुल्हड़ बनाने के व्यवसाय में कुल लागत (Kulhad Making Business Cost)

कुल्हड़ का व्यवसाय शुरू करने के लिए आपको कम से कम रु 15,000 से लेकर रु 20,000 निवेश करने होंगे. यह निवेश राशि आपको केवल प्रथम बार ही इतनी मात्रा में निवेश करनी होगी. क्योंकि आपको मशीनरी के अलावा कुछ रॉ मैटेरियल इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए खरीदने होते हैं. जोकि बहुत कम कीमत में या यू कहें कि मुफ्त में आसानी से मिल जाता है. अतः जब आपका व्यवसाय शुरू हो जाएगा, तब आपको इसको संचालित करने के लिए बहुत ही कम निवेश करना होगा.

कुल्लड़ बनाने के व्यवसाय में मुनाफा (Kulhad Making Business Profit)

यदि हम इस व्यापार से कमाई की बात करें तो यह कुल्लड़ के आकार पर निर्भर करती है. क्योकि इसका इस्तेमाल कई अनेकों पेय पदार्थों के लिए किया जाता है, इसलिए इसके साइज के आधार पर भी इसकी खरीददारी की जाती है. यदि हम आपको इसे सैकड़ों के रूप में बिक्री करने का एक अंदाजा बताएं तो चाय के कुल्लड़ सैकड़ों के हिसाब से लगभग रु 50 में बिकते हैं, और लस्सी के कुल्लड़ लगभग रु 100 सैकड़ा बिकते हैं और इसके अतिरिक्त दूध के कुल्हड़ लगभग रु 150 सैकड़ा बिकते हैं. प्याली की बात करें तो यह रु 100 सैकड़ा का दाम पर मिलती है. कई बार इन चीजों की डिमांड बढ़ने पर आपको अच्छे दाम भी मिलने शुरू हो जाते हैं. जैसे गर्मी के दिनों में लस्सी और अन्य ठंडक प्रदान करने वाले पेय पदार्थों की बिक्री कुल्लड़ में ही की जाती है. इसीलिए गर्मियों में आपको अच्छा खासा कुल्हड़ का दाम प्राप्त होता है. इसके अतिरिक्त लोग सर्दियों में चाय और कॉफी कुल्लड़ में पीना पसंद करते हैं, इस वजह से आपको सर्दियों में भी अच्छा खासा मुनाफा होता है. कुल मिलाकर आपको कम लागत और अच्छा मुनाफा इस बिजनेस से हो सकता है.

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कुल्हड़ चाय का व्यापार शुरू करके कमाए अच्छा लाभ

आप चाहे तो कुल्हड़ चाय का व्यवसाय भी शुरू कर सकते हैं. इसमें आपका कुल्लड़ भी सप्लाई होगा और आप कुल्हड़ चाय का व्यवसाय भी हो सकते हैं. आज के समय में लोग कुल्हड़ में चाय पीना पसंद करते हैं इस वजह से इसकी कीमत में अच्छा मुनाफा होता है. हम बात करें गांव में तो लगभग कुल्हड़ की चाय का दाम रु 5 से लेकर रु 10 प्रति चाय होता है. वहीं अगर शहर में हम चाय पीते हैं, तो यह हमें रु 15 से लेकर रु 20 प्रति के दाम पर उपलब्ध होती है. इस दृष्टिकोण से हम अपने कुल्हड़ के व्यवसाय को डबल मुनाफे में परिवर्तित कर सकते हैं. इस व्यवसाय के जरिए आप रोज के कम से कम रु 700 से लेकर रु 1000 तक कमा सकते हैं.

कुल्हड़ दूध का व्यवसाय भी शुरू कर करें कमाई

ज्यादातर शहरी क्षेत्रों में अब लोग कुल्लड़ में दूध पीना बहुत पसंद करने लगे हैं और आज के समय में 200 मिलीलीटर की कुल्हड़ वाली दूध की कीमत लगभग रु 20 से लेकर रु 30 तक होती है. और यदि हम रोज के इसके मुनाफे की बात करें, तो इस व्यवसाय से लगभग रु 1000 तक प्रतिदिन बचा सकते हैं.

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कुल्हड़ बनाने के व्यवसाय की मार्केटिंग (Marketing)

आज लगभग हर एक क्षेत्र में रेस्टोरेंट और होटल आपको देखने को मिल जाते हैं, यहां तक कि बड़े-बड़े मॉल में भी अब कुल्हड़ में लोगों को पेय पदार्थ पिलाया जाता है. ऐसे में आप इन सभी क्षेत्रों में जाकर उनसे संपर्क करके आप अपने कुल्लड़ व्यवसाय की मार्केटिंग कर सकते हैं. इसके अतिरिक्त आपको आपके गांव में ही कई सारी छोटी-बड़ी दुकानें मिल जाएंगी जहां पर लोग चाय पीने आते हैं. आप चाहे तो ऐसे क्षेत्रों में जाकर अपने कुल्हड़ के व्यवसाय की मार्केटिंग बड़ी ही आसानी से कर सकते हैं. इन सभी चीजों के अतिरिक्त आप अपने क्रिएटिव माइंड की सहायता से भी अपने व्यवसाय को एक नया आयाम प्रदान कर सकते हैं.  

आज के समय में भारत सरकार द्वारा प्लास्टिक के बने पात्रों पर रोक लगा दी गई है. ऐसे अवसर का लाभ उठाकर आप कुल्हड़ के व्यवसाय को करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं, क्योंकि सरकार भी इस क्षेत्र में ऐसे लोगों को आवश्यक सहायता प्रदान कर रही है. इस प्रकार के व्यवसाय को करने में आपका ज्यादा निवेश नहीं होता और अच्छा मुनाफा भी हो जाता है.

एफएक्यू (FAQ’s)

Q : कुल्हड़ बनाने के लिए उपयोग में होने वाली मशीन की कीमत क्या है ?

Ans : वैसे तो कुल्हड़ बनाने वाली मशीन का दाम कुछ ज्यादा महंगा नहीं होता, परंतु आपकी सुविधा अनुसार यदि आप मशीन खरीदते हैं, तो लगभग आपको रु 5000 से लेकर रु 8000 के बीच में खर्च करने होंगे.

Q : कुल्लड़ बनाने के लिए कच्चा माल कहां से मिलेगा ?

Ans : वैसे तो कुल्हड़ बनाने के लिए आपको ज्यादा कुछ नहीं चाहिए होता है फिर भी कुछ कच्चा माल आवश्यक होता है, जैसे कि अच्छी क्वालिटी वाली मिट्टी, मिट्टी आपको अपने नजदीकी तालाब या नदी से प्राप्त हो जाती है. यह बिना लागत में मिल जाती है.

Q : अपने बनाए हुए कोई कुल्हड़ को कहां बेचे ?

Ans : आप अपने बनाए हुए कुल्लड़ को नजदीकी रेस्टोरेंट, होटल या फिर चाय – कॉफी की दुकानों पर बेच सकते हैं.

Q : कुल्हड़ बनाने के व्यवसाय से कितना मुनाफा हो सकता है ?

Ans : किसी भी व्यवसाय का मुनाफा उसकी सेलिंग पर डिपेंड करता है. जितना ज्यादा आप अपने कुल्हड़ में क्वालिटी देंगे और जितना ज्यादा आप अपने कुल्हड़ को मार्केट में सप्लाई करेंगे आपको उतना ही मुनाफा होगा. अनुमानित रूप से कम से कम आपको रु 30,000 से लेकर रु 45,000 प्रति माह इससे मुनाफा हो सकता है.

Q : क्या कुल्हड़ को दोबारा उपयोग किया जा सकता है ?

Ans : अगर आपके कुल्हड़ में क्वालिटी हैं, जिससे वे लंबे समय तक चल सकते हैं, तो आप इसका उपयोग इसे साफ करके दोबारा कर सकते हैं.

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