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मार्केटिंग कैसे करें व मार्केटिंग के बेहतरीन तरीके | Type of Marketing and Best Marketing Tips in Hindi

मार्केटिंग कैसे करें व मार्केटिंग के विभिन्न तरीके | Marketing kya hai, Type, Strategy Tips in Hindi

आज के समय में पैसे खर्च कर व्यापार स्टार्ट करना तो बहुत आसान काम है, मुश्किल है तो आपकी सोच को लोगों तक पहुँचना और लोगों को अपनी ओर आकर्षित करना. मार्केटिंग और प्रमोशन ही वह चीजें है, जिसके द्वारा आप अपना प्रोडक्ट और सेवाएँ लोगों तक पहुंचा सकते है और लोगों को इसके संबंध में जानकारी दे सकते है.

वैसे तो मार्केटिंग के कई तरीके उपलब्ध है, परंतु आपको अपना व्यवसाय उसका आकार और प्रकार देखकर सही तारीका चुनने की आवश्यकता होती है. और कई हद तक आपकी मार्केटिंग का तरीका आपके बजट और आपके प्रोडक्ट या सेवा पर भी निर्भर करता है.

marketing | मार्केटिंग

मार्केटिंग क्या है ? (what is Marketing) ?

मुख्यतः मार्केटिंग वह तरीका है जिसके द्वारा लोग अपनी जरूरतों और इच्छाओ की पूर्ति के लिए आपके व्यापार से परिचित होते है. हमारे आसपास कई ऐसे उदाहरण मौजूद होते है, जिनमें लोगों के पास एक बहुत अच्छा बिज़नेस प्लान होता है, परंतु उसे सही मार्केटिंग ना मिल पाने की वजह से वह लोगों तक नहीं पहुँच पाता और असफल हो जाता है.

आपको अपने व्यापार को सफल बनाने के लिए यह आवश्यक है कि आप अपने दायरे से बाहर आकर लोगों तक अपनी सोच को पहुंचाये और अपने लिए एक ग्राहकों का आधार तैयार करे. एडवरटाइजिंग, सेलिंग और प्रमोशन मार्केटिंग का ही एक भाग है, परंतु मार्केटिंग केवल इन तक सिमित नहीं इससे और भी बहुत कुछ जुड़ा हुआ है.

मार्केटिंग के 6 पी (6 P’s of Marketing ) :

जब आप अपने प्रोडक्ट या सेवा को लांच करते है तो आपको मुख्यत 6 बातों को ध्यान रखना पड़ता है, इन्हें मार्केटिंग के 6 पी के नाम से जाना जाता है. यह 6 पी निम्न है:

  1. प्रोडक्ट
  2. प्राइस
  3. प्लेस
  4. प्रमोशन
  5. पीपल
  6. प्रोसेस
  • प्रोडक्ट : प्रोडक्ट से हमारा यहाँ तात्पर्य उस वस्तु या सेवा से है, जो आप अपने ग्राहकों को प्रदान करते है. जब आप अपने व्यापार के रूप में सेवा का चयन करते है तो आपको इसकी पैकेजिंग और लेबलिंग जैसे फीचर्स की चिंता करने की आवश्यक्ता नहीं होती, परंतु इसके लिए आपको ब्रांडिंग और क्वालिटी का विशेष ध्यान रखना होता है. वही अगर आप कोई प्रोडक्ट अपने ग्राहकों तक पहुँचाना चाहते है, तो आपको इसकी पैकेजिंग, लेबलिंग, ब्रांडिंग और क्वालिटी सभी बातों का ध्यान रखना आवश्यक होगा. इसके अलावा आपको अपनी प्रोडक्ट सेफ्टी का भी बहुत ध्यान रखना होता है.
  • प्राइस : प्राइस किसी भी वस्तु या सेवा की वह कीमत होती है, जो कि ग्राहक वस्तु या सेवा के बदले में प्रदान करता है. अपनी किसी भी वस्तु या सेवा का प्राइस तय करते वक्त आपको मार्केट में उपलब्ध अन्य प्रतिस्पर्धियों का ध्यान रखना पड़ता है. परंतु यदि आपका प्रोडक्ट बेस्ट और यूनिक है तो आप अपने मन माफिक प्रॉफिट कमा सकते है. कॉम्पेटेटिव प्राइस का यह फंडा कुछ लग्सरी प्रोडक्ट के लिए भी फेल हो जाता है. जैसे ऑडी और मर्सिडीज जैसी कारो की कीमत मार्केट में उपलब्ध अन्य करो की अपेक्षा बहुत ज्यादा है. परंतु इन्हें उससे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि इनका टार्गेट मार्केट ही अलग है. परंतु अगर आप कोई नया प्रोडक्ट लांच कर रहें है, तो आपको मार्केट को ध्यान में रखना होगा.
  • प्लेस : प्लेस वह जगह है, जहाँ से आपके ग्राहक आपका प्रोडक्ट या सर्विस खरीदते है. इसमे मार्केटिंग के सभी चैनल भी सम्मिलित होते है. मार्कटिंग में निम्न चैनल शामिल है.
  1. ग्राहक को डायरेक्ट रिटेलिंग : इस तरीके से आप डायरेक्ट स्टोर या अन्य आउटलेट खोलकर अपनी सेवा या प्रोडक्ट ग्राहकों को ऑफर कर सकते है. इस स्थिति में प्रोडक्ट या सर्विस की प्राइस अपेक्षाकृत कम होती है, क्योंकि इस स्थिति में मध्य के चैनलों में लगने वाले खर्चे की बचत होती है और यह प्रॉफिट व्यापारी को स्वयं मिलता है.
  2. वस्तुओं को होलसेलर के माध्यम से बेचना : होलसेलर वह बीच की कड़ी है, जिसके माध्यम से वस्तु एक व्यक्ति से होकर अन्य तक पहुँचती है. जब आप अपने व्यापार का दायरा बढ़ा लेते है, तो आपको होलसेलर की आवश्यक्ता पड़ती है.
  3. फ्रेंचाइजी : फ्रेंचाइजी आज के समय में बहुत जरूरी है, पहले केवल वस्तुओं के लिए होलसेलर के द्वारा व्यापार का दायरा बढ़ाया जा सकता था. परंतु अब विशेष ट्रेनिंग और ट्रिक्स के जरिये सेवाओं का भी दायरा बढ़ाया जाना संभव हुआ है. जावेद हविब्स, मेक्डोनल्स फ्रेंचाइजी, पिज़्ज़ा हट आदि कई सफल फ्रेंचायजी के उदाहरण हमारे सामने मौजूद है.
  4. रिटेल ऑनलाइन : आजकल ऑनलाइन मार्केटिंग बहुत चलन में है, इसके द्वारा आप अपनी वस्तु या सेवा डायरेक्ट ऑनलाइन तरीके से अपने कस्टमर को प्रदान कर सकते है. आजकल विशेषकर वस्तुओं के लिए यह बहुत ही सफल है, इसकी वजह से ग्राहक के पास ज्यादा वैरायटी और चॉइस मौजूद हुई है.
  5. इन सब के अलावा आप अपने प्रोडक्ट को बेचने के लिए डिस्ट्रीब्यूटर, कंसलटेंट या एजेंट का भी उपयोग कर सकतें है.
  • प्रमोशन : प्रमोशन मार्केटिंग का सबसे अहम् हिस्सा है, इसी के सहायता से आप अपना प्रोडक्ट या सर्विस कस्टमर्स तक पहुंचाते है. आजकल हमारे पास प्रमोशन के कई तरीकें जैसे वेबसाइट, सोशल मीडिया, ब्लॉगिंग, इ-न्यूज़ लेटर, नेटवर्किंग, पंपलेट, टीवी, रेडिओ, प्रिंट एडवरटाइजिंग, वर्ड ऑफ़ माउथ एडवरटाइजिंग, लायल्टी एंड रिवॉर्ड प्रोग्राम, कोल्ड कालिंग, आदि. इन तरीको का उपयोग कर आप अपने बिज़नेस को बेहतर पहचान दिलवा सकते है.
  • पीपल : यहाँ पीपल से हमारा तात्पर्य आपके ग्राहकों से ना होकर आपके सप्लायर, डिस्ट्रीब्यूटर, होलसेलर, स्टैक होल्डर और आपके एम्प्लाइज से है. यह सभी लोग आपके व्यापार में आपकी टीम का एक हिस्सा होते है और आपके व्यापार की सफलता में सभी का बराबर का हिस्सा होता है.
  • प्रोसेस : आपके बिज़नेस की सफलता के लिए कस्टमर सर्विस और मार्केटिंग प्रोसेस बहुत ही अहम् हिस्सा है. मार्केटिंग प्रोसेस में समय पर नया स्टोक आर्डर करना. इसे समय पर ग्राहक तक पहुँचाना, आपके ग्राहक से फीडबैक एकत्रित करना और सेल्स और फाइनेंशियल रिपोर्ट का रेगुलर एनालिसिस करना आदि शामिल है. अगर इनमे से अगर कुछ भी गड़बड़ा जाता है तो आपका मार्केट और बिज़नेस दोनों प्रभावित होते है .

जब भी आप कोई नया बिज़नेस स्टार्ट करते है और उसके लिए मार्केटिंग के तरीके सोचते है तो वह सारे तरीके इन्हीं 6 चीजों के आस पास होकर जाते है. परंतु हर किसी के दिमाग में हमेशा यह बात रहती है कि अपने बिज़नेस की मार्केटिंग कैसे करे? उसके तरीके क्या होंगे? आपकी इसी समस्या का हल निकालने के लिए मार्केटिंग के कुछ तरीके हम आपको दे रहें है जो आपके काम आयेंगे.

 मार्केटिंग के कुछ तरीके (Marketing strategy or Type of Marketing in hindi)

  • कॉज मार्केटिंग (Cause Marketing): इस तरह की मार्केटिंग से तात्पर्य अपने ग्राहकों के लिए अपने प्रोडक्ट या सर्विस को लेकर कुछ ऐसे कारण उत्पन्न करना जिससे वह किसी अन्य लुभावने ऑफर की जगह आपके प्रोडक्ट या सर्विस को ही चुने. इसका सबसे अच्छा उदाहरण ऑडी और मर्सिडीज जैसी कार कंपनिया है, जिनकी मार्केटिंग के लिए ये कम्पनीज मार्केटिंग के परंपरागत तरीको को उपयोग नहीं करती, फिर भी इनका अच्छा खासा मार्केट उपलब्ध है.
  • एम्प्लोयी मार्केटिंग : बहुत से बिज़नेस अपने एम्प्लाइज को अपने पोटेंशिअल कस्टमर्स और ब्रांड एंमबेसडर मानते है. इस फैक्ट में विश्वास रखते हुए कुछ व्यक्ति अपने एम्प्लाइज को बेनेफिट्स के रूप में उन्हें अपने प्रोडक्ट्स के लिए डिस्काउंट देते है. और जब एम्प्लोई इन प्रोडक्ट और सर्विस से संतुष्ट होते है, तो वे इसका प्रमोशन भी करते है और आपका व्यापार फैलाने में मदद करते है.
  • बिज़नेस टू कंसुमर मार्केटिंग : इस तरह की मार्केटिंग में कंपनी सीधे अपने ग्राहक से संपर्क में रहती है और डायरेक्ट ही अपने प्रोडक्ट और सर्विसेज कस्टमर्स को ऑफर करती है. कई परिस्थितियों में यह अपना व्यापार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीको से ऑपरेट करती है. इसमे सभी मार्केटिंग स्ट्रेटेजी कस्टमर डाटा के अनुसार बनाई जाती है. इसमे आपको अपने ग्राहक को पूर्ण रूप से पहचानने की आवश्यक्ता होती है, जैसे वह कहा रहता है, उसकी चॉइस क्या है, उसका इनकम कितना है और वह आपके लिए कितने पैसे खर्च कर सकता है आदि. इस तरह की मार्केटिंग के लिए अमेज़न और फ्लिप्कार्ट जैसी कम्पनीज़ बहुत अच्छा उदाहरण है जो कि ऑनलाइन स्टोर संचालित कर अपने ग्राहकों को सीधे सेवा प्रदान करती है.
  • बिज़नेस टू बिज़नेस मार्केटिंग (B2B Marketing) : यह बिज़नेस टू कस्टमर मार्केटिंग से थोड़ा भिन्न है, इसमें एक बिज़नेस किसी अन्य बिज़नेस को अपनी सेवाएँ प्रदान करता है. और इस तरह की मार्केटिंग में बिज़नेस टू कस्टमर मार्केटिंग के विपरीत मार्केटिंग में कई चैनल शामिल होते है और हर में चैनल प्राइस, खरीदनें और बेचने का तरीका, पेमेंट का तरीका, स्टोरेज, आदि से संबंधित कई डिसिज़न भी लेने होते है.
  • डायरेक्ट सेलिंग : इस तरह की मार्केटिंग में आप अपने ग्राहकों के संपर्क में सीधे आते है और उन्हें अपने प्रोडक्ट के फायदे, और फीचर्स से सीधे परिचित करवाते है. इस तरह की मार्केटिंग में सबसे अच्छा तरीका होता है कि आप अपने ग्राहकों का एक ग्रुप तैयार कर उन्हें अपने प्रोडक्ट की जानकारी दे और यहाँ अपने ग्राहकों को आकर्षित कर उन्हें अपना प्रोडक्ट सेल करे. इस तरह की मार्केटिंग में बीच चैनलों में आने वाला खर्चा भी बच जाता है और बिज़नेस ओनर को अधिक फायदा होता है. एवोन और एमवे जैसी कंपनी इसका बहुत अच्छा उदाहरण है जिन्होंने इस तरह से अपना एक अलग मार्केट और ग्राहक तैयार कर सफलता प्राप्त की है.
  • कोब्रांडिंग और एफ़िनिटी मार्केटिंग : किसी भी व्यापार के लिए यह सत्य है कि आपके कॉम्पिटिटर आपके ग्राहकों को बाट देते है, परंतु यह भी बिलकुल सत्य है कि कई ऐसे व्यापार भी होते है, जिनके साथ आप अपने ग्राहक साझा करते है. उदाहरण के लिए यदि कोई कंपनी किसी विषय पर ऑनलाइन कोचिंग प्रदान करती है, तो उसके ग्राहक किसी स्टडी मटेरियल बेचने वाली कंपनी के ग्राहक हो सकतें है.          

को-ब्रांडिंग या  एफ़िनिटी मार्केटिंग में वे दो कम्पनीज़ साथ आकर व्यापार करती है जिनके ग्राहक सेम है. क्योंकि ये एक दुसरे के प्रत्यक्ष प्रतिद्वंदी नहीं होते, इसलिए यह साथ आकर अपने कॉम्पिटिटर को बेहतर कॉमपीटीशन देते है.

  • अर्न मीडिया : मेरे ख्याल से मीडिया टर्म को लेकर सभी लोग बहुत कंफ्यूज रहते है, मीडिया मार्केटिंग के लिए बहुत जरुरी चीज है, परन्तु इसके कई तरीके है, जैसे:
  1. ब्रांडेड मीडिया वह मीडिया होता है, जो कि कोई कंपनी अपने प्रोडक्ट के बारे में लोगों को इन्फॉर्म करने, एंटरटेन करने या बिजी करने के उद्देश्य से बनाती है.
  2. पेड मीडिया किसी भी तरह का एडवरटाइज हो सकता है, जो कि पैसे लेकर किया जाता है. यह पुर्णतः आपके बजट, प्रोडक्ट और आपकी लोकेशन पर निर्भर करता है कि आप किस तरह का पेड मीडिया यूज़ करना चाहतें है.  
  3. इन सब के विपरीत अर्न मीडिया पुर्णतः मुफ्त मीडिया का माध्यम है, इसका मुख्य साधन पब्लिक रिलेशन है. इसे कई बार समाचार पत्रों, मैगज़ीन या ब्लॉग के माध्यम से भी उपयोग किया जाता है. यहाँ आप इस बात से कंफ्यूज होंगे कि समाचार पत्रों या मैगज़ीन के माध्यम से एडवरटाइज करने में तो पैसे लगते है, तो इसका जवाब यह होगा कि इन माध्यम से एडवरटाइज के तो पैसे लगते है, परन्तु जब इन  साधनों के द्वारा आपकी न्यूज़ पब्लिश करके आपके काम की सराहना की जाती है, तो इसके पैसे नहीं लगते और आपको पब्लिसिटी भी मिलती है. इसी के साथ अर्न मीडिया के द्वारा किये गए प्रचार पर पब्लिक विश्वास भी अधिक करती है.
  • पॉइंट ऑफ पर्चेस मार्केटिंग : पॉइंट ऑफ पर्चेस या पॉइंट ऑफ सेल मार्केटिंग से हमारा तात्पर्य आपके किसी प्रोडक्ट को सेल करते समय ग्राहक को अन्य प्रोडक्ट के लिए आकर्षित करना है. उदहारण के लिए जब आप किसी मॉल में जाते है, तो बिलिंग काउंटर के पास कुछ प्रोडक्ट सजाकर रखे जाते है, तो उस समय सेलर का उद्देश्य उन प्रोडक्ट्स की तरफ ग्राहक को आकर्षित करना होता है. इसी का एक अन्य उदाहरण जब आप किसी साईट पर कोई ब्लॉग पड़ते है, तो नीचे की ओर अन्य ब्लोग्स की लिंक दी होती है, इससे साईट ओनर का उद्देश्य रीडर को उन ब्लोग्स की ओर आकर्षित करना होता है. यह मार्केटिंग का बहुत ही अच्छा तरीका है.
  • इंटरनेट मार्केटिंग : इंटरनेट मार्केटिंग के कई तरीके हो सकतें है, इसी के साथ यह आज के समय में मार्केटिंग का इफेक्टिव और कम कॉस्ट वाला तरीका है. इसमें आप सोशल मीडिया, ई-मेल, ब्लोगिंग आदि में से किसी भी तरीके का उपयोग कर सकते है. किसी भी तरह कि मार्केटिंग जो आप इंटरनेट के जरिए करतें है वह इंटरनेट मार्केटिंग के अंतर्गत आती है. परन्तु अपने व्यवसाय के प्रमोशन के लिए आपको उचित रणनीति बनानी होगी. इसी के साथ विभिन्न तरीको और टेकनिक्स के जरिए आप अपनी इन एक्टिविटी का अनुकरण भी कर सकतें है कि यह सही दिशा में जा रही है की नहीं और आपके बिज़नेस के लिए यह सही है या नहीं. 
  • पेड मीडिया एडवरटाइजिंग : अगर आप अपने बिज़नेस का प्रचार तेजी से करना चाहतें हैं तो पेड मीडिया आपके लिए सबसे अच्छा माध्यम है. इसके लिए आपको पैसे खर्च करने होते है परन्तु जल्द ही यह पैसे वसूल भी हो जाते है. पेड मीडिया मार्केटिंग के निम्न प्रकार है : 
  1. पेड सोशल
  2. डिस्प्ले एडवरटाइजिंग
  3. टीवी, रेडिओ या न्यूज़ पेपर के द्वारा एडवरटाइज करना
  4. बिलबोर्ड्स
  5. प्रिंट एड आदि
  • पेड मीडिया को यूज़ करने से पहले आपको अपने बजट और प्रोडक्ट के हिसाब से इसका चयन करना होगा. कई बार बहुत बड़े लेवल पर जाने पर इसमें आपका खर्चा बहुत अधिक हो जाता है.  
  • वर्ड ऑफ माउथ एडवरटाइजिंग : इंटरनेट के आ जाने से यह मार्केटिंग का बहुत ही इफेक्टिव तरीका बन गया है. अब इस तरह कि मार्केटिंग के लिए यह बिलकुल आवश्यक नहीं है कि आप फेस टू फेस आकर इस तरीके से मार्केटिंग करे. फेसबुक, व्हाटस एप आदि ने इसे और भी ज्यादा सुलभ बना दिया है. उदाहरण के लिए यदि आपका कोई ब्यूटी सलून है और आपका कोई कस्टमर आपसे कोई ब्यूटी टिप्स मांगता है तो आप उसे अपने विभिन्न प्रोडक्ट सजेस्ट कर सकतें है.
  • सोशल नेटवर्क और वायरल मार्केटिंग : आप यह अंदाजा नहीं लगा सकते, कि किस तरह का संदेश सोशल मीडिया के द्वारा जल्दी वायरल हो जायेगा, मतलब जल्द ही लोगों तक पहुँच जायेगा. न आप यह अंदाजा लगा सकते है कि सोशल मीडिया पोस्ट, ब्लॉग या आर्टिकल आदि में से क्या जल्दी लोगों तक पहुंचेगा.

परंतु आज इंटरनेट और स्मार्ट फ़ोन के युग में यह मार्केटिंग का सबसे उपयुक्त तरीका है. अगर आप इनमे से मार्केटिंग का सही तरीका चुनने में सफल होते है, तो आप अपने कस्टमर्स तक भी बहुत जल्द पहुंचकर उन्हें आकर्षित कर सकते है.

निम्न टिप्स का उपयोग करके आप अपने कंटेंट को वायरल कर सकतें है.

  1. अगर आप अपने एडवरटाइजमेंट में इमेज या विडियो यूज़ करे तो आपके लिए लोगों का ध्यान आकर्षित करना आसान होगा. 
  2. यदि आप अपने फॉलोअर्स पहले बना लेते है और फिर अपना कंटेंट शेयर करते है आपका मेसेज जल्दी वायरल हो जाता है.
  3. अगर आप अपने फ्रेंड्स और फॉलोवर्स को अपना कंटेंट शेयर करने का कहते है तब भी आपका मेसेज जल्दी और ज्यादा लोगों तक वायरल हो जाता है.
  4. अगर आप अन्य के मुकाबले कुछ ज्यादा एंटरटेनिंग, इन्सपायरिंग और एजुकेशन डाटा यूज़ करतें है तो लोगों का ध्यान आपकी और ज्यादा आकर्षित होता है.
  5. अगर आप लोगों को आपका कंटेंट शेयर करने के लिए इंसेंटिव देते है तो यह भी आपके लिए अपना डाटा वायरल करने का एक अच्छा माध्यम होगा . 
  • स्टोरी टेलिंग : यहाँ स्टोरी टेलिंग से हमारा तात्पर्य किसी नॉवेल लिखने या फिल्म बनाने से नहीं है, यहाँ स्टोरी टेलिंग से हमारा मतलब अपना मेसेज इफेक्टिव तरीके से आपने दर्शको तक पहुँचाना है. मार्केटिंग के इस तरीकें से आप अपनी ऑडियंस से इमोशनली कनेक्ट होते है. आप चाहे तो अपने दर्शकों को अपने ब्रांड की स्टोरी, अपनी सक्सेस स्टोरी या अपने किसी ग्राहक की स्टोरी शेयर कर सकते है.
  • रेफरल प्रोग्राम्स : यह मार्केटिंग स्ट्रेटेजी आपके पहले से बने हुए कस्टमर्स पर निर्भर करती है इन्ही के द्वारा आपके लिए नए कस्टमर्स बनाये जाते है. उदाहरण के लिए यदि आप अपने एक्सिस्टिंग कस्टमर्स को नए कस्टमर्स लाने पर कोई ऑफर या डिस्काउंट देते है तो यह आपके बिज़नेस के लिए फायदे का सौदा होगा.
  • कांटेस्ट मार्केटिंग : कांटेस्ट मार्केटिंग एक बहुत ही इफेक्टिव और इनोवेटिव तरीका है, जिसके द्वारा कस्टमर्स आपकी तरफ आकर्षित होते है. आज के समय में यह तरीका फेसबुक और ट्विटर पर बहुत लोकप्रिय है, इसके माध्यम से बहुत बड़ी संख्या में लोग आपकी साईट पर आते है. कई बार अपने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए किराना स्टोर्स और सुपर मार्किट ओनर्स भी कई तरह के कांटेस्ट चलाकर अपने ग्राहकों को आकर्षित करतें है.  
  • नेटवर्किंग इवेंट : नेटवर्किंग से यहाँ हमारा मतलब उन लोगों तक पर्सनल रूप पहुँचना है, जो आपकी सेवाओं से खुश हो. यह आवश्यक नहीं है कि हर समय ऑनलाइन मार्केटिंग आपके लिए कारगर हो, कई बार आपको स्वयं सामने आकर अपने ग्राहकों से संपर्क साधना होता है. और इस दशा में आप अपने प्रोडक्ट को बेहतर तरीके से लोगों तक पहुंचा सकते है.  
  • रिटार्गेटिंग : मार्केटिंग के इस तरीके से आप जल्दी ही अपने कस्टमर को अपने लॉयल कस्टमर में परिवर्तित कर सकते है. मार्केटिंग के इस तरीके में पेड एडवरटाइजिंग आपके लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है क्योंकि इससे आपके ग्राहक आपके प्रोडक्ट से परिचित होते है. उदाहरण के लिए यदि आप किसी समूह को अपने प्रोडक्ट से परिचित करवाते है और फिर उसके संबंध में अपने फेसबुक अकाउंट पर जानकारी अपडेट करते है तो ये लोग आपकी जानकारी को इंटरेस्ट से पढ़ते है और आपके प्रोडक्ट कि और आकर्षित होते है.  ·
  • सोशल मीडिया मार्केटिंग : सोशल मीडिया कम खर्च में अत्यधिक जागरूकता उत्पन्न करने वाला साधन है. आज कल हर कोई सोशल मीडिया पर उपलब्ध है और जरूरत की स्थिति में इसे यूज़ भी करता है. आप चाहे तो अपने इस अकाउंट की सहायता से अपने व्यापार का प्रमोशन भी कर सकते है. और उपयुक्त जानकारी अपने फॉलोवर्स तक पहुंचा भी सकते है.  
  • इनबाउंड मार्केटिंग : इनबाउंड मार्केटिंग एक परफेक्ट मार्केटिंग का तरीका है. इसमें आप बिना किसी पैसे को खर्च किये अपने कस्टमर्स के साथ एक अच्छा रिलेशन बना लेते है. इनबाउंड मार्केटिंग में वह सभी एक्टिविटी शामिल होती है जो लोगों को आपके व्यापार के प्रति आकर्षित करती है. इस प्रकार कि मार्केटिंग में आप किसी टेलीविज़न पर एड देने की अपेक्षा लोगों से पर्सनली मिलते है या उनसे सोशल मीडिया पर संपर्क साधते है और उन्हें आकर्षित करतें है.
  • आउटबाउंड मार्केटिंग : आउटबाउंड मार्केटिंग मार्केटिंग का सबसे पुराना और सदियों से यूज़ हो रहा तरीका है. हालाँकि सदियों पुराने तरीको में अब थोड़ा बदलाव जरुर आ चूका है, जो समय के साथ जरुरी भी है. इनबाउंड मार्केटिंग के कई लाभ होने के बावजूद भी लोग बड़ी सक्सेस के लिए मार्केटिंग के इस तरीके को उपयोग में लाते है. साथ ही यह एक साथ अधिक लोगों को टारगेट भी करते है.
  • सेगमेंटेशन : सेगमेंटेशन से तात्पर्य विभाजन से है, और यह मार्केटिंग में सही और टार्गेटेड प्रमोशन के लिए आवश्यक भी है. उदहारण के लिए यदि आप ऑनलाइन कोई फिटनेस कौर्स चला रहे है तो आपके सामने कई तरह के कस्टमर जैसे जिन्हें वेट लोस करना है, जिन्हें वेट गेन करना है, जो बॉडी बिल्डिंग करना चाहते है या जो स्ट्रेंथ गेन करना चाहते है आदि होते है. सभी के लिए अलग तरह के प्रमोशन की जरुरत होगी. इस लिए आपकेा अपने कस्टमर का सेगमेंटेशन करना आवश्यक है.  
  • ईमेल केमपेनिंग : ईमेल केमपेनिंग आपको अपने कस्टमर्स से सीधे संपर्क साधने में मदद करती है. इसके द्वारा आप अपने कस्टमर्स का सेगमेंटेशन कर उन्हें अपने प्रोडक्ट की जानकारी या कोई अन्य इनफार्मेशन डायरेक्ट प्रदान कर सकते है. इसके आलावा आप अपनी डिस्काउंट, न्यू कलेक्शन, सेल, कूपन आदि से संबंधित जानकारी भी डायरेक्ट कस्टमर्स को सेंड कर सकते है. आज कल कई बड़ी कंपनीज जैसे पैंटालून, मेट्रो, स्पाईकर, मैक्स आदि भी मार्केटिंग का यह तरीका बखूबी यूज़ करती है और अपने कस्टमर्स को अपने स्टॉक और पॉलिसीस से अवेयर रखती है.  
  • ब्रांडिंग : यहाँ ब्रांडिंग से तात्पर्य कस्टमर के दिमाग में अपनी एक इमेज सेट करना है. इसमें कंपनी का लोगों, टैगलाइन, स्वर, संरचना आदि शामिल होता है. ब्रांडिंग का सबसे सही तरीका अपने कस्टमर्स के सामने यह फिगरआउट करना है कि आप मार्केट में फर्स्ट पोजीशन पर क्यों है. आज के समय में ब्रांडिंग का सबसे अच्छा उदहारण ठंडा मतलब कोकाकोला, रेमंड अ कम्पलीट मेन, गोदरेज अलमारी आदि है. 
  • एजाइल मार्केटिंग (Agile Marketing) : मार्केटिंग के इस तरीके से तात्पर्य विभिन्न प्रयासो के माध्यम से कस्टमर के मन में अपनी ब्रांड के प्रति एक विश्वास उत्पन्न करने से है. इसके लिए आप कस्टमर सर्वे, कस्टमर डाटा एनालिसिस आदि तरीके उपयोग कर सकते है.  
  • एफिलिएट मार्केटिंग : अगर आप जल्द ही बहुत सारे कस्टमर को टारगेट करना चाहतें है तो आप मार्केटिंग के इस तरीके को यूज़ कर सकते है. इसके अंतर्गत आप अपनी कंपनी की मार्केटिंग के लिए किसी अन्य कंपनी से एफिलिएट होते है और आपके लिए उनके द्वारा बनाये कस्टमर्स के लिए उन्हें कमीशन प्रदान करतें है.         
  • ऑगमेंटेड रियलिटी मार्केटिंग : यह एक एक्स्ट्रा ऑडीनरी टाइप की मार्केटिंग है साथ ही यह अन्य मार्केटिंग के तरीको से ज्यादा महंगा विकल्प है. आज कल हर सेवादाता मार्केट में विभिन्न तरीको से ग्राहकों तक पहुँचने का विकल्प खोज रहा है ताकि वह उन्हें अपने प्रति आकर्षित कर सके. उदाहरण के लिए अभी हाल ही में आने प्रोडक्ट में खराबी की खबर के चलते आशीर्वाद आटा और मैगी जैसी नामी कम्पनीज सोशल मीडिया और टेलीविज़न के जरिए सामने आकर इस तरीके से मार्केटिंग के विकल्प को चुना था. 

आप अपने व्यापार के लिए इनमे से कोई भी मार्केटिंग का तरीका यूज़ कर सकतें है. यह पुर्णतः आपके बिज़नेस के प्रकार और आपकी लोकेशन पर निर्भर करता है कि आप कौनसा तरीका चुनते है. परन्तु किसी भी निर्णय पर पहुँचने से पहले आपको अपने बिज़नेस के लिए एक परफेक्ट प्लान बना लेना चाहिए और उसी के हिसाब से आगे बढ़ना चाहिए ताकि आप अपने व्यापार में उचित सफलता पा सकें .

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