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इंडिया में ऑनलाइन मैगजीन बिजनेस | How to start Online Magazine Business plan in India in hindi

इंडिया में ऑनलाइन मैगजीन बिजनेस लागत , फायदा  (How to start Online Magazine Business plan in India|  Cost, Profit in India in hindi |  How to Make Money by Magazine Business)

भारत में न्यूज़ पेपर और मैगजीन  का चलन कई दशक से चला आ रहा है. मध्यम वर्ग के लोगो को सुबह की चाय के साथ न्यूज़ पेपर का आन्नद प्राप्त हो इसलिए ऑनलाइन मैगजीन  एक अच्छा माध्यम है . इस कारण से भारत में ऑनलाइन मैगजीन का मार्केट बेहद लोकप्रिय हो गया है .

ऑनलाइन मैगजीन बिजनेस | Online Magazine Business

ऑनलाइन मैगजीन  के फायदे (Benefit of Online Magazine) :

  • द्रडता : ऑनलाइन मैगजीन  तब तक प्रकाशित होती रहेगी, जब तक के पोर्टल के पास पर्याप्त जानकारी उपलब्ध होती रहेगी, तब तक प्रकाशन होता रहेगा और ये मैगजीन  सदा के लिए सुरक्षित ही रहेगी .
  • इंटरैक्टिव : ऑनलाइन मैगजीन में व्यक्तिगत जानकारी अधिक होती है . ऑनलाइन मैगजीन  में कई दूसरी लिंक भी मिलती है जिसकी मदद से दूसरी साईट पर आसानी से जाया जा सकता है . इसके अलावा विडियो डाल देने से न्यूज़ मे एक नई जान आ जाती है .
  • पर्यावरण के लिए लाभदायक : पारंपरिक मैगजीन  मे पेपर का उपयोग किया जाता है. जिसके लिए कागज की आवश्यकता होती है और कागज के लिए कई पेडो को काटा जाता है जो , की पर्यावरण के लिए नुकसान दायक है . इसलिए ऑनलाइन मैगजीन  और न्यूज़पेपर सबसे अच्छा माध्यम है , और पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है .
  • कम लागत: ऑनलाइन मैगज़ीन की बढती लोकप्रियता को देखते हुए पब्लिशर ने सब्सक्रिप्शन कास्ट को कम किया है. जिससे वेब एप्लीकेशन पारम्परिक प्रकाशन से अधिक सस्ते और अच्छे होते जा रहे है .

ऑनलाइन मैगजीन  बिजनेस को कैसे शुरू किया जाए (How to Start Online Magazine Business) :

पूर्व उत्पादन प्लान (Planning ) :

बिजनेस प्लान : कोई भी उद्योग को शुरू करने के लिए ये बहुत जरुरी है, कि एक सटीक और सही बिजनेस प्लान बनाया जाए . ये सबसे पहली स्टेप है यदि इस पर सही ध्यान न दिया जाए , तो परिणाम में असफलता ही मिलती है . ऐसे किसी प्लान बनाते समय उद्देश्य को ध्यान मे रखते हुए एक सही राह बना कर सफलता प्राप्त की जा सकती है .

पाठको के बारे में जानकारी प्राप्त करना : ऑनलाइन मैगजीन  का वास्तविक प्रकाशन करने से पूर्व ये बहुत जरुरी है के मार्केट का पूर्ण अवलोकन किया जाए . इससे जो भी डाटा प्राप्त होगा, उससे हमे पाठकों की रूचि के बारे में जानकारी प्राप्त होगी .

मार्किट मे प्रतिस्पर्धा की जानकारी : ये बहुत जरुरी है   कि जब हम कोई मैगजीन  का प्रकाशन कर रहे है, तो हमे मार्किट में उपलब्ध अन्य मैगजीन  की जानकारी भी होना चाहिए. ये सीधे प्रतिद्वंदी होते है हमे इनके बिजनेस मॉडल और जानकारी से  नए आईडिया प्राप्त हो सकते है .

पर्याप्त फंड एकत्रित करना : कोई भी मैगजीन  छोटी हो या बडी उसके लिए एक पर्याप्त फंड की जरुरत पड़ती है . इसमे प्रिंट पब्लिकेशन से कम लागत लगती है . यदि पर्याप्त फंड नहीं है तो जरुरी है कि फंड जमा करने के लिए प्लान बनाया जाए .

मैगजीन का ऑनलाइन रिप्रजेंटेशन (Create Online Representation of the Magazine):

सही नाम का चुनाव : आरंभिक प्लान जब बन जाए, उसके बाद सही नाम का चुनाव करना होता है. इसके लिए बहुत अधिक समय लग सकता है , नाम जो भी हो प्रकाशन की जानकारी के साथ पाठको के लिए कुछ यूनिक या नया होना चाहिए .

डोमेन नाम का चुनाव : वेबसाईट बनाने के लिए डोमेन नाम की जरुरत होती है . भारत मे कई डोमेन रजिस्ट्रेशन  और होस्ट स्पेस प्रदान करने वाली कम्पनी उपलब्ध है जैसे गो डेडी . जैसे ही इन साईट पर लागऑन करते है हमे ये देखना होता है जिस नाम का चुनाव हमने किया है वो उपलब्ध है या नही है अगर यह पहले से उपलब्ध है तो हमे तब  इसके बाद हमे अगले नाम पर काम करना है. फिर हमे .कॉम , डॉट कॉम, डॉट इन और डॉट सीओ डॉट इन  ,हमारी  जरुरत और उपलब्धता के अनुसार मिलते है . डोमेन पैकेज मे साईट का चार्ज 500 से 1000 के बिच हो सकता है .

होस्ट स्पेस अटेंड करना : जब डोमेन नाम का चुनाव पूर्ण हो जाए, इसके बाद होस्ट स्पेस को परचेस करना होता है . बहुत सी डोमेन रजीस्ट्रेशन कंपनी होस्ट सर्विस भी प्रदान करती है . होस्टिंग सर्विस प्रोवाइडर सर्वर स्पेस का ऑफर भी देते है जिससे हम वेबसाइट को शुरू या एक्टिवेट कर सकते है . इस सर्विस की कीमत 900 से 1500 प्रतिवर्ष तक हो सकती है.

ऑनलाइन मैगजीन  के लिए सही समूह (Proper Team for Starting the Online Magazine):

जब बिजनेस प्लान , फण्ड, मार्केट की जानकारी , पूर्ण हो जाए, तब समय होता है कि एक सही समूह का निर्माण किया जाए या ह्यूमन रिसोर्स डिपार्टमेंट बनाया जाए . ऑनलाइन प्रकाशन मे जब तक सफलता नहीं मिल सकती, जब तक की समर्पित समूह ना हो . टीम बनाने के लिए राईटर , एडिटर , फोटोग्राफर , प्रूफरीडर और फोटो एडिटर की आवश्यकता होती है . इसके साथ ही सेल्स मेनेजर , मार्केटिंग एक्सपर्ट , पब्लिकेशन मेनेजेर की भी जरुरत होती है .

कन्टेन्ट क्रिएशन और पोस्टिंग (Content Creation and Posting) :

कन्टेन्ट लिखना : ऑनलाइन मैगजीन  हो या ऑफलाइन ये जरुरी है, कि रीडर को रोचक और सही जानकारी प्रदान की जाए . कोई भी पत्रिका को लोकप्रिय बनाने के लिए ये जरुरी है उसमे उपलब्ध जानकारी आकर्षक रोचक और सही हो . ये कॉपीरायटर की जिम्मेदारी होती  है कि वो ऐसी कहानी बनाए जो मजेदार भी हो और पाठको के मन को लुभा सके . लिखना प्रोडक्शन का सबसे पहला और महत्वपूर्ण कार्य होता है . इस काम के लिए ऑनलाइन फ्रीलांसिंग भी रख सकते है. ऑनलाइन फ्रीलांसिंग से पैसा कमाकर लिखने वाले बहुत लोग बाजार में बहुत होते हैं,

प्रूफ रीडर या कॉपी रीडर : राइटर जब भी कहानी लिखते है या टाइप करते है, तो वे टाइपिंग करने मे बहुत सी गलतिया करते है . जब भी कंटेंट पूर्ण हो जाता है, तब इसे प्रूफरीडर को भेजा जाता है . प्रूफ रीडर को कॉपी रीडर भी कहा जाता है . इनके पास ग्रामर और शब्दों की अच्छी जानकारी होती है . ये कंटेंट को देख कर चेक करके और जो गलतिया होती है उन्हे  सही करके एडिटर को पंहुचा देते है .

फाइनल करेक्शन : जब यह कॉपी एडिटर के पास आती है . तब यह निश्चित होता है कि इसे प्रकाशित करना है की नही, यदि एडिटर को भी कुछ कमी महसूस होती है तो इसे फिर से क्रम के अनुसार पहुचाया जाता है .

फोटो के साथ सबुत पेश करना : मैगजीन  पाठको को न केवल उसकी लिखावट के लिए आकर्षित करती है बल्कि इसमे उपलब्ध रंगीन चित्र भी पाठको का मन मोह लेते है . हर मैगजीन  मे एक फोटोग्राफर होता है जिसका काम होता है उस मैगजीन  के कन्टेन्ट के अनुसार सही फोटो का चुनाव करना .

एक अच्छे प्रभाव के लिए आकर्षित पेज डिजाइन करना: पारम्परिक न्यूज़पेपर एक साधारण रूप से एक समान बनाया जाता है . पर ऑनलाइन मैगजीन  मे ऐसा नही होता , जब कन्टेन्ट और फोटोग्राफ तैयार हो जाते है उसके बाद पेज डिजाईन करने के लिए पेज लेआउट डिज़ाइनर को भेजा जाता है . फिर पेज डिजाइनर का काम होता है कुछ आकर्षक एलिमेंट को जोड़ कर कन्टेन्ट को सही क्रम मे रखे .

फाइनल प्रोटोटाइप : प्रोडक्शन की प्रक्रिया मे प्रोटोटाइप बनाना एक दूसरा महत्वपूर्ण कार्य होता है प्रोटोटाइप हमे मैगजीन  पेज का एक फाइनल लुक बताता है . जब एडिटर प्रोटोटाइप से संतुष्ट हो जाता है तब आगे का काम किया जाता है इसके बाद कन्टेन्ट का डीजीटाईजेशन किया जाता है .

कन्टेन्ट डीजीटाईजेशन : प्रोटोटाइप बनाने में सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है जैसे सुधार करने मे , कुछ खास प्रोग्राम डिजाईन करने मे जैसे वर्ड प्रेस , कन्टेन्टफुल , बजस्प्रोउट , की आवश्यकता होती है जिससे कन्टेन्ट को वेबसाइट पर पोस्ट किया जाता है . फाइल के स्पेसिफिकेशन के अनुसार डिजिटलाइजेशन करना इसका अंतिम कार्य होता है .

अनुमति या परमीट (No Permits for Online Magazine) :

प्रिंट न्यूज़ पेपर का रजिस्ट्रेशन कराना बहुत ही मुश्किल कार्य है साथ ही इसमे समय भी बहुत अधिक लगता है . इंडिया मे न्यूजपेपर रजिस्टरार या आर एन आई , न्यूज पेपर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट प्रदान करता है , पर ऑनलाइन मे ऐसा करने की कोई आवश्यकता नही होती है . एक बार यदि हमने कोई मैगजीन  के नाम को वेबसाइट पर डाल दिया तो कोई और उस नाम को उपयोग नही कर सकता है .

ऑनलाइन मैगजीन  मे कर्मचारी की आवश्यकता (How Many Employee Do You Need):

ऑनलाइन मैगजीन  को घर बेठे ही बनाया और उस पर कार्य किया जा सकता है, यदि हमारे पास  एक अच्छी टीम हो, जिसमे सभी कर्मचारी कर्मठ हो और एक दुसरे के साथ तालमेल बना के काम कर सकते हो तो .

ऑनलाइन मैगजीन  के लिए कुछ ही कर्मचारियों की आवश्यकता होती है . जब भी मैगजीन  को पब्लिश किया  जाता है तो यह उसके कन्टेन्ट और उसके साईंज पर आधारित होता है कितने कार्यकर्ता की जरुरत है 3 या 5 कन्टेन्ट बनाने वाला , एडिटर , फोटोग्राफ़र , वेब डिज़ाइनर सबसे बहुत महत्वपूर्ण होते है . एडिटर प्रूफ रीडर का काम भी करता है यह कन्टेन्ट बना भी सकता है और बिजनेस को बढाने के लिए अन्य कार्यकर्ता को भी चुन सकता है .

ऑनलाइन मैगजीन  मे कैसे पैसे बनाये (How to Make Money With Online Magazine? (Revenue Generation):

ऑनलाइन मैगजीन का एजेंडा होता है पैसे कमाना , ऑनलाइन मैगजीन  बिजनेस मे पैसे कमाने के कई रास्ते होते है . प्रकाशन के कई तरीके होते है, जिसमे पाठक एक निश्चित राशी जमा करते है यह मासिक या वार्षिक हो सकती है , पर यह केवल इसपर ही निर्भर नही होता है ऑनलाइन विज्ञापन से भी पैसे प्राप्त किए जा सकते है . मैगजीन  मे एक ब्लॉग सेक्शन होता है जिसमे विज्ञापन के लिए एक निश्चित राशी ली जाती है .

इसके लिए कई कम्पनी मदद भी करती है यदि साईट पर ट्राफिक हो जाता है, तो ये कंपनी प्रमोशन मे मदद करती है. जब ऑनलाइन विज्ञापन हमारी साईट पर चलते है, तो हमे एक निश्चित राशी प्राप्त होती है. इससे लिंक द्वारा कुछ जुड़े हुए कुछ प्रोडक्ट मैगजीन  पर आते जाते है . जब भी कोई यूजर इन प्रोडक्ट को खरीदने के लिए क्लिक करते है तब एक निश्चित राशी हमे प्राप्त होती है .

ऑनलाइन मैगजीन  बिजनेस में लागत (Investment in Online Magazine Business) :

यदि एक छोटे स्तर पर ऑनलाइन मैगजीन  का बिजनेस शुरू करना चाहते है तो इसमे बहुत अधिक लागत नही लगती है . 3000 से भी कम कीमत में डोमेन नाम और होस्ट स्पेस प्राप्त किया जा सकता है . इन दोनो के लिए वार्षिक राशी देना होता है कुछ डोमेन नाम और होस्ट स्पेस 900 से 1200 प्रति वर्ष प्रत्येक के लिए हो सकता है , यह इसके पेकेज पर निर्भर करता है .

ऑनलाइन मैगजीन में फायदा (Online Magazine Profit Amount) :

इसमे फायदा या प्रॉफिट तुरंत प्राप्त नही होता, कन्टेन्ट पर निर्भर करता है यह पाठको को पसंद आना चाहिए और विज्ञापन साईट पर ट्राफिक पर निर्भर करते है . इसमे विज्ञापन और प्रयोजन आसानी से प्राप्त करे जा सकते है . पाठक को यदि इसमे रूचि होती है तो  इसके लिए लग रहे शुल्क के लिए भी संकोच नही करते है . इसमे 15% से 18% तक का फायदा पहले कुछ महीनो मे ही प्राप्त हो जाता है . यदि एक से अधिक प्लेटफार्म पर कार्य किया जाता है, तो बहुत जल्दी ही ज्यादा  प्रॉफिट बनाया जा सकता है.

ऑनलाइन मैगजीन  बिजनेस मे रिस्क (Risk in Online Magazine Business) :
ऑनलाइन रिप्रजेंटेशन से इसे शुरू किया जा सकता है . पर इसमें विविधता बहुत जरुरी है क्योंकी यह एक तलाब मे बड़ी मछलियो के साथ तेरने जैसा है . केवल ऑनलाइन मैगजीन  पेज पर्याप्त नही होता इसके साथ वेबसाइट मॉडल भी होना चाहिए इसके लिए एक से अधिक प्लेटफार्म  पर कार्य करना पढता है .

अपने पाठको और प्रयोजको के साथ हमेशा जुड़े हुए रहना चाहिए, ताकि हम यह जानकारी प्राप्त कर सके की पाठक और प्रायोजक क्या चाहते है .

ऑनलाइन मैगजीन  मे मार्केटिंग और विज्ञापन टिप्स (Marketing and Advertisement Tips for Online Magazine) :

पारम्परिक प्रमोशन : सही प्रमोशन सफलता की नीव होती है . सही शब्दों के चुनाव से ही हम एक अच्छा कंटेंट बना सकते है और पाठको को आकर्षित कर सकते है. पारंपरिक विज्ञापन को कई तरह से प्रकाशित किया जाता है जैसे कार के पीछे लगा कर , ओद्योगिक विज्ञापन न्यूज़ पेपर मे दे कर , मैगजीन  और रेडिओ के द्वारा .

सोशल मीडिया टूल : सोशल मीडिया या सोशल प्लेटफार्म पर अपनी प्रोफाइल बना कर मैगजीन  का प्रमोशन किया जा सकता है , इस प्रोफाइल पर लिंक का उपयोग कर के पाठको को इसके बारे में जानकारी प्रदान कर सकते है . इसमें हम कुछ चुने हुए पाठको को भी ले सकते है . इसमे हम जल्दी और ज्यादा से ज्यादा प्रकाशन कर सकते है . अपने परिवार के सदस्यो और दोस्तो को हम लिंक शेयर करने का बोल सकते है जिससे यह और अधिक लोगो तक पहुच सके .

ईमेल मार्केटिंग प्रोसेस : यदि हमारे पास पर्याप्त पाठक उपलब्ध है तो हम ईमेल मार्केटिंग का उपयोग कर सकते है . इसमे हम न केवल उचित मेसेज ही भेजते है यद्यपि पाठको को यह भी अनुभव महसूस करते है के वे रचनात्मक तरीके से हमसे जुड़े हुए है .

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One comment

  1. आपने हर चीज बहुत ही विस्तार से समझाई है और यही नहीं आपकी हर पोस्ट विस्तारपूर्वक जानकारी से परिपूर्ण रहती है और उस से भी अच्छी बात यह है की आप अपनी मात्र भाषा में content लिखते हैं

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