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स्ट्रॉ (पाइप) बनाने का व्यापार कैसे शुरू करें | How to start straw making business plan in hindi

स्ट्रॉ (पाइप) बनाने का व्यापार कैसे शुरू करें | How to start straw making business plan in hindi

दुनिया में ऐसे कई तरह के व्यापार हैं, जिन्हें आसानी से शुरू किया जा सकता है. इन व्यापारों को खोलने के लिए किसी तरह की पढ़ाई लिखाई की भी जरूरत नहीं पड़ती है. बस व्यक्ति को हर चीज की अच्छी सूझबूझ होना जरूरी है. वहीं अगर आप अपना व्यापार खोलने का सोच रहे हैं तो आप स्ट्रॉ (पाइप) बनाने का व्यापार खोल सकते हैं. इस व्यापार को खोलने के लिए आपका ज्यादा पढ़ा लिखा भी होना जरूरी नहीं है. साथ ही आपको ये व्यापार को खोलने के लिए ज्यादा धन-राशि की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी. 

स्ट्रॉ एक ऐसी चीज है जिसका इस्तेमाल लगभग हर इंसान द्वारा किया जाता है. इसलिए आपको अच्छे से पता होगा कि आखिर ये स्ट्रॉ किसे कहते हैं, ये किस तरह से और किस लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. वहीं अगर इस व्यापार के आकड़ों को देखा जाए तो भारत में इस उत्पाद की काफी मांग है. ये एक ऐसा उत्पाद है जिसे मॉल से लेकर छोटी-सी-छोटी दुकानों में इस्तेमाल किया जाता है. आज हम आपको स्ट्रॉ किस तरह से बनाए जाते हैं, इसको बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, इस व्यापार से जुड़ी मशीन और इत्यादि चीजों की जानकारी देने वाले हैं.

स्ट्रॉ

कितने तरह के होते हैं स्ट्रॉ– (Type of straw)

स्ट्रॉ दो तरह के होते हैं एक कागज से बनने वाला स्ट्रॉ और एक प्लास्टिक से बनने वाला स्ट्रॉ. अगर इन दोनों तरह के स्ट्रॉ की तुलना की जाए तो कागज के स्ट्रॉ का इतना इस्तेमाल नहीं किया जाता है, लेकिन ये स्ट्रॉ पर्यावरण की नजर से काफी सही साबित होते हैं. वहीं प्लास्टिक स्ट्रॉ की बात करें, तो इन स्ट्रॉ की बाजार में ज्यादा मांग है. जहां पर कागज से बनाए गए स्ट्रॉ के टूटने और खराब होने की संभावनाएं ज्यादा होती हैं, वहीं प्लास्टिक से बने स्ट्रॉ में इस तरह का कोई भी खतरा नहीं होता है. इसलिए अगर आप स्ट्रॉ बनाने का व्यापार शुरू करने वाले हैं, तो प्लास्टिक के स्ट्रॉ बनाना ही फायदेमंद साबित होगा.

स्ट्रॉ बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री– (Raw material for straw making business)

अब तक तो आपको ये अच्छे से पता चल गया होगा, कि स्ट्रॉ व्यापार को अगर सही तरीके से चलाया जाए, तो इस व्यापार के जरिए आप कई सारे पैसे कमा सकते हैं. इस व्यापार को शुरू करने के लिए सबसे पहले आपको ये पता होना जरूरी है कि स्ट्रॉ को बनाने के लिए किन वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाता है. नीचे आपको इस व्यापार से जुड़ी मशीन और सामग्री के बारे में बताया गया है.

स्ट्रॉ बनाने में इस्तेमाल होने वाली मशीन (straw making machine)

किसी भी व्यापार को शुरू करने से पहले जिस चीज के बारे में सबसे अच्छे तरीके से पता होना चाहिए वो है उस व्यापार से जुड़ी मशीन. स्टॉ बनाने के लिए भी मशीन का इस्तेमाल किया जाता है. इस व्यापार में दो प्रकार की मशीनों की जरूरत पड़ती है. जिनमें से पहली मशीन स्ट्रॉ बनाने का काम करती है जब की दूसरी मशीन उनको काटने का काम करती है.

मशीन की कीमत (straw making machine price)

स्ट्रॉ बनाने में इस्तेमाल की जाने वाली मशीनों की कीमतों की बात करें, तो स्ट्रॉ का निर्माण वाली मशीन की आरम्भिक राशि लगभग 4 लाख है. वहीं स्ट्रॉ को काटने वाली मशीन की कीमत 50 हजार से शुरू होती है. इस तरह कम लागत में आप सिल्वर पेपर बनाने का काम भी शुरू कर सकते है.

कहां से खरीदें ये मशीन (where to buy straw making machine)

इन मशीनों को या तो आप बाजार से या फिर आसानी से अपने घर पर सीधे ऑनलाइन प्रक्रिया द्वारा खरीद सकते हैं. नीचे बताए गए लिंक पर जाकर आप इन मशीनों को खरीद सकते हैं. वहीं ऑनलाइन अगर आप इन मशीनों को खरीदते हैं, तो ये मशीन 20 दिनों के अंदर आप तक पहुंच जाएगा.

https://dir.indiamart.com/impcat/pp-straw-making-machine.html

https://www.alibaba.com/showroom/straw-making-machine.html

https://www.tradeindia.com/manufacturers/straw-making-machine.html

स्ट्रॉ बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और उसकी कीमत (straw making raw material and price)

दूसरी चीज जो इस व्यापार के लिए काफी जरूरी है, वो है इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री. स्ट्रॉ बनाने के लिए प्लास्टिक मोती (beads) और कर्लररेंट का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन ध्यान रखें की कर्लररेंट का इस्तेमाल स्ट्रॉ को रंग देने में किया जाता है. इसलिए आपको जिस तरह के रंग के स्ट्रॉ चाहिए उसी तरह का कर्लररेंट खरीदें. वहीं प्लास्टिक मोती की कीमतों की बात करें तो इनकी कीमत प्रतिकिलो 120 रूपए से शुरू होती है और ये आसानी से बाजार में उपलब्ध हैं.

स्ट्रॉ बनाने की प्रक्रिया– (straw manufacturing process in hindi)

स्ट्रॉ बनाने के लिए सबसे पहले आपको स्ट्रॉ बनाने वाली मशीन में प्लास्टिक मोती और कर्लररेंट को एक साथ डालना होगा. इस मशीन द्वारा इन दोनों चीजों को अच्छे से मिला दिया जाएगा और फिर इन दोनों को पिघला दिया जाएगा. जिसके बाद मशीन में लगे ढलवां (moulded) के जरिए आपको इस पिघली हुई सामग्री को स्ट्रॉ का आकार देना होगा. जब पिघली हुई सामग्री को आकार मिल जाएगा, उसके बाद इन्हें दूसरी मशीन की मदद से काटना होगा. ऐसा करते ही आपकी स्ट्रॉ बनकर तैयार हो जाएंगे. वहीं जब आप स्ट्रॉ बनाने वाली मशीन खरीदे तो ये पता जरूर कर लें की मशीन द्वारा कितने समय में कितने स्ट्रॉ बनाएं जाएंगे.

उत्पाद की पैकिंग (straw packaging)

स्ट्रॉ बन जाने के बाद उन स्ट्रॉ की पैकेजिंग करना भी काफी जरूरी होता है. आप इन स्ट्रॉ को प्लास्टिक के लिफाफे में पैक कर सकते हैं. लेकिन पैकिंग करने से पहले ये जरूर तय कर लें कि कितने स्ट्रॉ को एक लिफाफे में पैक करना है.

एहतियात भरतना भी है जरूरी (precaution)

जब भी आप किसी प्रकार का बिजनेस शुरू करते हैं, तो उससे जुडी काफी चीजों पर एहतियात बरतना जरूरी होता है. स्ट्रॉ बनाते हुए भी आपको ध्यान रखना चाहिए कि आग लगने वाली कोई भी वस्तु स्ट्रॉ के पास ना हो. क्योंकि प्लास्टिक की वस्तु काफी जल्दी आग पकड़ लेती हैं. 

व्यापार से जुड़ी अन्य चीजें– (straw making business facts)

किसी भी व्यापार को शुरू करने से पहले जिन चीजों के बारे में अच्छे से अनुसंधान कर लेना चाहिए, उसके बारे में नीचे जानकारी दी हुई है, जो इस प्रकार हैं-

  • स्थान का चुनाव (location for business) – अपना व्यापार शुरू करने के लिए सही स्थान का चुनाव करना काफी महत्वपूर्ण होता है. जब भी आप अपने व्यापार को चलाने के लिए किसी जगह को चुनते हैं, तो ध्यान में रखें कि उस जगह पर बिजली और पानी जैसी सुविधा आसानी से मौजूद हों. इसके अलावा उस जगह में ट्रासपोर्ट की कैसी सुविधा है इस पर भी अनुसंधान कर लें.
  • लोगों की नियुक्ती किसी भी व्यापार को शुरू करने से पहले ये जरूर तय कर लें, कि इस व्यापार को चलाने के लिए आपको कितने लोगों को काम पर रखना होगा. ये चीज तय हो जाने के बाद आप लोगों की नियुक्ती कर लें और बजट में उनको दी जाने वाली सैलरी को भी शामिल कर लें.
  • मार्केट अनुसंधानबाजार में जाकर अनुसंधान करने से आपको ये पता चल जाएगा कि किस तरह के स्ट्रॉ को ज्यादा खरीदा जा रहा है. इसके अलावा आप कुछ दुकानदारों से या फिर स्ट्रॉ खरीदने वाले लोगों से अच्छी खासी जान पहचान बना लें. ताकि जब आप अपना व्यापार शुरू करें, तो ये लोग आपके द्वारा बनाए गए उत्पाद को खरीद लें.

लाइसेंस और परमिट– (straw making business license) किसी भी व्यापार को शुरू करने के लिए सरकार द्वारा लाइसेंस और परमिट लेना जरूरी होता है. इसलिए आप भी अपने व्यापार को शुरू करने से पहले उसके लिए अपने राज्य की सरकार से लाइसेंस और परमिट जरूर ले लें.

विपणन (मार्केटिंग) और प्रमोशन– (Marketing and business promotion) कोई भी व्यापारी विपणन और प्रमोशन के जरिए अपने उत्पाद को ज्यादा से ज्यादा खरीदारों के बीच बेच सकता है. इसलिए आप भी इन दोनों चीजों का खास ध्यान रखें. आप अपने उत्पाद की मार्केटिंग या प्रमोशन कई तरह से कर सकते हैं जैसे सीधा उस उत्पाद को खरीदने वाले व्यापारों से जाकर मिले या फिर किसी अखबार में अपने उत्पाद के बारे में जानकारी देना.

व्यापार का बजट (total cost of straw making business) स्ट्रॉ का व्यापार खोलने के लिए आपको कम से कम आठ लाख रूपए की जरूरत पड़ेगी. इन आठ लाख में मशीन का खर्चा, स्थान का खर्चा, लाइसेंस लेने की प्रक्रिया में होने वाले खर्च, स्थान का किराया और इत्यादि खर्चे शामिल हैं. वहीं अगर आपके पास इतनी राशि नहीं है, तो आप बैंक से लोन भी ले सकते हैं या फिर सरकार द्वारा व्यापार से जुड़ी चलाई जा रही योजनाओं के जरिए सरकार से आर्थिक मदद ले सकते हैं.

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