टायर का बिजनेस शुरू करें | Tyre Shop Business Plan in Hindi

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गाड़ी के लिए सबसे जरुरी चीज होती हैं टायर, टायर के बिना गाड़ी चलाना असंभव है. टायर का बिज़नेस ऑटो मोबाइल क्षेत्र में एक प्रमुख बिज़नेस में से एक है. इन दिनों भारत में गाड़ी की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है, जिसके चलते टायर का बिज़नेस भी बहुत बढ़ रहा है. यदि आप ऑटो मोबाइल पार्ट्स के क्षेत्र में बिज़नेस करने के बारे में सोच रहे हैं तो टायर के व्यापार के साथ जा सकते हैं. इसके लिए आपको किन – किन चीजों की आवश्यकता होगी और आप इसे कैसे शुरू कर सकते हैं इसकी जानकारी हम यहाँ आज आपको देने जा रहे हैं.

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टायर का व्यापार कैसे शुरू करें   

गाड़ियाँ विभिन्न तरह की एवं विभिन्न साइज़ की होती है. ऐसे में आपको इस बिज़नेस की शुरूआत करने से पहले सभी गाड़ियों के साइज़ के अनुसार उनके टायरों के विषय में जानकारी प्राप्त करनी होगी. क्योंकि जब आपका ग्राहक आपसे इसके बार में कुछ पूछेगा और आपको इसकी जानकारी नहीं होगी, तो आपका उस पर गलत इम्प्रैशन पड़ेगा. और आपके गलत इम्प्रैशन के कारण आपके बिज़नेस पर भी गलत प्रभाव पड़ेगा.   

टायर का व्यापार की बाजार में मांग

जब आप टायर का व्यवसाय शुरू कर रहे हैं तो आपको इसके बाजार के बारे में थोड़ी सी रिसर्च करने चाहिए, कि इस बिज़नेस की वहां कितनी मांग है, एवं इससे कितना मुनाफा हो सकता है. वैसे तो भारत में इस बिज़नेस की मांग ज्यादा ही रहती हैं, क्योंकि यहां पर अधिक मात्रा में वाहन बिक रहे हैं. हालाँकि आपको बता दें कि अधिकतर टायर जैसे प्रोडक्ट का बिज़नेस करने वाले लोग शहरों में ही होते हैं. इसलिए आप शहरी इलाकें में ही इस बिज़नेस की शुरुआत करें.

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टायर के व्यवसाय में प्रोडक्ट का चयन

आपको इस बिज़नेस को शुरू करने से पहले पब्लिक ट्रांसपोर्ट का निरिक्षण करने की आवश्यकता होगी, ताकि आपको यह पता चल सकें कि उस क्षेत्र में किस तरह के वाहन ज्यादातर चलायें जाते हैं. फिर आप उन्हीं के अनुसार अपने इस व्यापार की शुरुआत कर सकते हैं. हालाँकि आप चाहे तो सभी तरह के वाहन के टायर रख सकते हैं जैसे कि दो चक्का, चार चक्का आदि. इसके अलावा इससे संबंधित कुछ अन्य चीजें भी आप अपने इस बिज़नेस में रख सकते हैं जैसे कि ट्यूब, रिम आदि और भी चीजें. आप वहां पर मौजूद शोरूम के बारे में भी जानकारी हासिल कर लें.

टायर के व्यवसाय के प्रकार का चयन

टायर का व्यवसाय 2 तरीकों से किया जाता है. आपको उनमें से एक का चयन करके अपना बिज़नेस शुरू करना होगा.

  • सभी कंपनी के टायर का बिज़नेस :- इस बिज़नेस में आपको खुद की एक दुकान खोलनी होगी जहां पर आप सभी कंपनी के टायर रखेंगे. और फिर उसे बेचेंगे.
  • किसी कंपनी की फ्रैंचाइज़ी लेकर :- दूसरा तरीका हैं कि आप टायर बनाने वाली किसी कंपनी से फ्रैंचाइज़ी लेकर उसका बिज़नेस कर सकते हैं. इसके लिए आप कंपनी को चुन सकते हैं जिसकी मांग बाजार में ज्यादा होती है.

हालाँकि इन दोनों ही तरह के बिज़नेस को करने में आपको मुनाफा होगा.

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टायर के व्यवसाय के लिए जगह

टायर का व्यवसाय शुरू करने के लिए आपको एक स्थान की आवश्यकता होगी जहां पर आप सभी तरह की कंपनी के टायर रखकर उसका बिज़नेस कर सकते हैं. या फिर जिस कंपनी कि अपने फ्रैंचाइज़ी ली हैं उस कंपनी के टायर रख सकते हैं. यह जगह एक दुकान के रूप में हो सकती है. जिसके लिए आपको कम से कम 500 से 1000 वर्ग फुट तक की दुकान की आवश्यकता होगी. यह दुकान आप ऐसी जगह पर शुरू करें जहां पर गाड़ियों का चला बहुत अधिक है यानि कि हाईवे में, यहाँ पर आपको ज्यादा मुनाफा मिलने की संभावना बढ़ सकती है.

टायर के व्यवसाय के लिए लाइसेंस एवं पंजीकरण

व्यवसाय चाहे कोई भी हो उसके लिए लाइसेंस एवं पंजीकरण करना आवश्यक होता है. इसके लिए भी आपको निम्न लाइसेंस की आवश्यकता होगी –

  • ट्रेड लाइसेंस :- व्यापार के लिए ट्रेड लाइसेंस सबसे जरूरी होता हैं इसके बिना आपका व्यवसाय कानूनी रूप से मान्य नहीं माना जायेगा.
  • जीएसटी रजिस्ट्रेशन :- किसी भी व्यवसाय को शुरू करने के लिए जीएसटी नंबर लेने के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन आवश्यक है. इसलिए इस बिज़नेस में भी आपको यह करना होगा.
  • शॉप एंड इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत पंजीयन :- आप अपने इस बिज़नेस के ऑटो मोबाइल क्षेत्र में दुकान खोल रहे हैं तो आपका शॉप एंड इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत पंजीयन होना भी आवश्यक है.
  • डोमेन पंजीयन :- यदि आप ऑनलाइन इस बिज़नेस की मार्केटिंग करते हैं तो आपको इसके लिए डोमेन पंजीयन कराना होगा.

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टायर के व्यवसाय के लिए कर्मचारियों की आवश्यकता

आपको वैसे तो इस बिज़नेस में ज्यादा लोगों की आवश्यकता नहीं पड़ेगी. लेकिन हेल्पर के रूप में आप 1-2 लोगों को रख सकते हैं जोकि वे गाड़ी से संबंधित यदि किसी ग्राहक को कोई परेशानी होती हैं वे उसे सही कर सकेंगे. लेकिन इसके लिए आवश्यक यह होगा कि उस व्यक्ति को इसके संबंध में पूरा अनुभव हो.

टायर के व्यवसाय की मार्केटिंग

आपके टायर के इस बिज़नेस की मार्केटिंग बहुत जरुरी हैं क्योंकि इसके बिना आपका बिज़नेस नहीं चल सकेगा. आपको पोस्टर एवं बैनर लगवाए होंगे ताकि ज्यादा लोगों को आपके इस बिज़नेस के बारे में जानकारी हासिल हो. शुरुआत में आपको अपने ग्राहकों को थोडा डिस्काउंट भी देना होगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्राहक आपके पास आयें. ग्राहकों कि मांग के अनुसार सभी तरह की चीजें अप अपनी शॉप में रखें क्योंकि ग्राहक भगवन होता हैं उसे कभी भी खाली हाथ नहीं लौटाया जाता है.

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टायर के व्यवसाय में लगने वाली कुल लागत

इस बिज़नेस में आपको कितना खर्च करना होगा यह आपके बिज़नेस के प्रकार पर निर्भर करता है, यदि आप सभी तरह की कंपनी के टायर का बिज़नेस शुरू करते हैं तो आपको इसमें कम से कम 5 से 7 लाख रूपये तक का निवेश करना होगा, वहीँ अगर आप किसी कंपनी की फ्रैंचाइज़ी लेते हैं तो उसके लिए 2 से 3 लाख रूपये की लागत लगेगी.

टायर के व्यवसाय से होने वाला मुनाफा

टायर के बिज़नेस में मुनाफा की बात करें तो इससे शुरुआत में कम से कम 40 से 50 हजार रूपये तक का मुनाफा प्रतिदिन हो सकता है. लेकिन धीरे – धीरे यह मुनाफा लाखों में भी बदल सकता है. इसके लिए जरूरी हैं कि लोग आपके पास ज्यादा आयें.   

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टायर के व्यवसाय में जोखिम  

टायर के बिज़नेस में जोखिम भी बहुत होता है. इसकी सबसे बड़ी वजह होती है लोकेशन की एवं बाजार में उसकी मांग की. यदि ये दोनों दी चीजें सही रिसर्च के साथ नहीं अपनाई जाती हैं तो आपको इस बिज़नेस में नुकसान झेलना पड़ सकता है.  

तो यह था टायर का बिज़नेस जिसे शुरू करके कोई भी व्यक्ति बेहतर कमाई कर सकता है. भारत में बढती जनसंख्या एवं गाड़ियों की बढती बिक्री के चलते इस बिज़नेस का बढना लाजमी ही है. इससे अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं.

FAQ

Q : टायर का व्यवसाय क्या है ?

Ans : यह गाड़ी में लगने वाले विभिन्न कंपनियों के टायर बेचने का व्यवसाय है.

Q : टायर का बिज़नेस कैसे करें ?

Ans : सभी कंपनी के टायर बेचकर या फिर किसी एक कंपनी की फ्रैंचाइज़ी लेकर.

Q : टायर के बिज़नेस में कितना निवेश करना होता है ?

Ans : लगभग 5 लाख रूपये.

Q : टायर के बिज़नेस में कितना मुनाफा होता है ?

Ans : 40 से 50 हजार रूपये प्रतिदिन.

Q : टायर के बिज़नेस में कौन – कौन से लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता होती है ?

Ans : ट्रेड लाइसेंस, जीएसटी रजिस्ट्रेशन, डोमेन रजिस्ट्रेशन एवं शॉप एंड इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन आदि.

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